भारत विकास परिषद् समाज में विभिन्न व्यवसायों व कार्यों में लगे श्रेष्ठतम् लोगों का एक राष्ट्रीय, अराजनैतिक, निःस्वार्थ, समाजसेवी एवं सांस्कृतिक संगठन है। इस संस्था की स्थापना का उद्देश्य भारतीय समाज का सर्वांगीण विकास करना है। इस विकास में सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक सभी प्रकार का विकास समाहित है। इस हेतु परिषद् सम्पन्न वर्ग को समाज के कार्य के लिए प्रेरित कर सेवा एवं संस्कार द्वारा निर्धन लोगों के उत्थान के कार्य में लगा रहा है।
हमारा दृष्टिकोण है मानव-जीवन के हर पहलू यथा…. सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक क्षेत्रों में देश का विकास व संबर्धन जिससे अन्ततोगत्वा बने : स्वस्थ – समर्थ – संस्कारित भारत ।
हमारा उद्देश्य है समाज के उच्च वर्ग, बुद्धिजीवियों व सुविधासम्पन्न लोगों में अपने देश के गरीब, असमर्थ, अशिक्षित व अज्ञानी लोगों के प्रति सेवा-भाव जागृत करना। लेकिन ये सेवा दया भाव के रूप में नहीं बल्कि अपनी देश की संस्कृति में बसी सेवा के कत्र्तव्य के रूप में।
परिषद् के उद्देश्यों व कार्यक्रमों को मूर्त रूप देने के लिए हमारे मूल सूत्र है - सम्पर्क-सहयोग-संस्कार-सेवा-समर्पण ।।