07/07/2021
व्यक्ति के स्वभाव को पहचानने के लिए उसके विचारों को समझना बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक इंसान के दिमाग मे, बहुत सारे विचार आते-जाते रहते है। किन्तु, जिस व्यक्ति की जुबान पर
1. केवल वही विचार आते है, जो वो समझता है कि, समाज के लिए उतरीण उद्धारण साबित होगा या तालियां बजेगी। ऐसे व्यक्ति को नेता गिरी करने वाले लोग की क्षणी में रखे।
2. जिस विचार को व्यक्ति व्यतिथ कर चुका होता है। (जियाँ हो)। और वो जुबान पर आता है। इसका मतलब, उसके जो भी नतीजे आए उससे वो सन्तुष्ट नही है। उस विचार को सुधारने की गुंजाइश है।
ऐसे लोगों को कन्फयूज लोगो की क्षेणी में रखे।
3. ऐसे विचार जो जीवन मे कभी उसे मौका या पल मिले, तो वो उस विचार को जीवन में, जीने की तम्मन्ना रखता हो।
ऐसे लोगो को उसके विचारों के अनुरूप आदरणीय की क्षेणी में रखे।
4. अपने जीवन काल मे, जिस विचार पर अमल करके / चलकर, प्रमाणिकता प्राप्त की होती है। और ऐसे विचार केवल उस व्यक्ति के आगे प्रगट करता है, जिसके साथ वो, अपना दुख बित जाने के बाद, और खुशी को आने से पहले, अपनी हर बात करता है। ऐसे व्यक्ति को पुज्यनीय लोगों की क्षेणी में रखे ।
किन्तु,
5. अगर कोई व्यक्ति, किसी विचार को, अपने जीवन में, एक सिद्धान्त के रूप में अपना लिया होता है तो, ऐसे विचार, उसकी जुबान पर कभी नही आते, किन्तु उस विचार के बारे में, वह सभी लोग जानते है, जो उसका नाम जानते है।
क्यों कि, वही तो उसकी पहचान होती है या बनती है। ऐसे व्यक्ति को अपना रोल मॉडल, मंथोर, आदर्श, लोगों की क्षेणी में रखे ।
इसके अलावा, अगर कोई, जब कभी भी, किसी के भी आगे, अपनी बात को, अपने विचार बता कर बोलते रहते है, तो वास्तव में उन बातों को बातें ही माने विचार नही। उनका कोई मोल नही होता। केवल टाइम पास, करने में वो काम आती है, क्यों कि ऐसी बाते "बोलने, सुनने और सुनाने में रोमांच पैदा करता है, अच्छा लगता है।
ऐसे व्यक्ति को कॉमेडियन, इंटरट्रेनेर लोगों की क्षेणी में रखे ।
Note :-
श्रेष्ठ विचारों की तुलना और तोलना सदा,
स्थिति, समय, कारण, कर्तव्य और मर्यादाओं के सम भाग, के दायरे में रख कर ही की जा सकती है।
ना कि,
कोई भी विचार, किसी भी बात पर, कोई भी मुद्दे पर, कभी भी जोड़ कर, उद्धहारण के रूप में नही लेना चाहिए। स्थितियां का सम एक ही हो तो कोपि पेस्ट किया जा सकता है। अन्यथा उसमें स्थितियाँ अनुसार बदलाव की अव्यसक्ता होती ही है।
यह पूरा संदेश केवल उन्हीं लोगो के लिए मान्यता प्रधान करता है, जो केवल अपने धर्म की मान्यता रखते है।
सावधान :-
पश्चिमी सभ्यता, मुस्लिम सभ्यता और हिन्दू सभ्यता को मिला झूला कर (MIX) करके, एक नई सभ्यता का आधार शिला रखने या निर्माण करने की कोशिश ना करें।
अगर करने की भी सोचते है, तो उस सभ्यता का पूरा धर्म ग्रन्थ तक बनाने की सोच के साथ ही उसका निर्माण करें। परन्तु, उसका रेफरेंस हिन्दू ग्रंथो से ही लेवे। ताकि, एक नई सभ्यता की रचना, मानव जीवन मे आने वाले, होने वाले, करने वाले, या वर्जित रखने वाले, हर दृष्टिकोण से उसका संविधान बना रहे। ताकि भविष्य की पीढ़ियों को गुमराह होने की कोई नोबत ही ना आए। यह जिमेदारी/दाइत्व भी ग्रंथ निर्माताओं की ही होती है।
अन्यथा, हिन्दू सभ्यता या मान्यता के अलावा जितने भी गर्न्थो पर सवाल खड़े होते है, धर्म परिवर्तन करते है, वहशी बन जाते है, मानवता को छंद विछन्द करने वाली घटनाएं करते है, उससे भी भयावक हाल, आपकी बनने वाली नई सभ्यता दूसरी सभ्यताओं का करेगी।
धन्यवाद
रमेश नेमचन्द राठी