28/06/2025
जोहार। झारखंड
भगवान बिरसा मुंडा को मेरा जोहार
19/6/2025 से 24/6/2025 का मेरा झारखंड प्रवास बहोत ही अविस्मरणीय रहा।
पहले झारखंड बिहार का एक हिस्सा था। यानी कि भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की जन्मभूमि वाला स्थान का तो एक हिस्सा। ऐसा कहना अनुचित नहि रहेगा। यहां का कुदरती सौंदर्य
बहुत हि अद्भूत।
प्रकृतिक झरने,घने जंगल और मेरे सरल स्वभाव के वनवासी भाई-बहन। सबको मेरा जोहार।
रास्ते मे आते पेड़ो को बार-बार पूछा आप तो कई सालों से है, क्या आपने भगवान बुद्ध का दर्शन किया है। अगर 'हा' है तो जवाब दो। मुझे सुनाई देगा। मेरे ठाकुर (भगवान रामकृष्ण परमहंस) मेरी सहायता करेंगे। और सच मे जंगल के शांत वातावरण मे आता हुआ संगीतमय ध्वनी आज भी अनभुति कराता है कि हां मे अभी भी यहां ही हूं। मेरे वनवासीओ के साथ। इसलिए एकबार झारखंड जाना चाहिए।
सरल और शांत स्वभाव के वनवासी आजभी प्रकृति के साथ अपना जीवन व्यतीत करते है।
कोई भी भौतिक सुख सुविधा नहि है फिर भी खुश है, आनंद मे है। पारंपरिक वेश-भूषा,भजन, संगीत, नृत्य,सात्विक भोजन,पारंपरिक रीति-रिवाज मे मस्त मेरे वनवासी।
झारखंड के जंगल, झरने और मेरे वनवासी को मेरा जोहार (प्रणाम)।