16/02/2026
आज महाराजा सूरजमल की जयन्ती है। उनका जन्म 13 फरवरी, 1707 को भरतपुर में एक सिनसिनवार जाट परिवार में हुआ था।
महाराजा सूरजमल असाधारण बुद्धिमत्ता, रणनीतिक दूरदर्शिता और न्यायपूर्ण शासन देने वाले ऐसे शासक थे, जिन्होंने भारत को एक राष्ट्र के रूप में देखा। इतिहासकार कर्नल टॉड ने उन्हें "भारत का प्लेटो" बताया है।
उन्होंने अपनी सुदृढ़ निर्णय क्षमता, राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों, किसानों के प्रति समर्पण और निष्पक्ष प्रशासनिक दृष्टिकोण के साथ भारत को संगठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
महाराजा सूरजमल अप्रतिम योद्धा थे। खेती-किसानी को महत्व देने वाले स्वयं महाराजा सूरजमल खेत में हल चलाने वाले किसान की ही तरह रहते और वैसी ही पोशाक पहनते थे। अपनी (ब्रज) भाषा से उन्हें बहुत प्यार था और वे स्वयं भी यही भाषा बोलते थे। मुगलों और अहमद शाह अब्दाली के अत्याचारों के विरुद्ध ब्रज क्षेत्र की रक्षा करने के कारण ही वे "ब्रजेन्द्र" कहलाए। महाराजा सूरजमल ने भगवान श्रीकृष्ण की ही तरह गोधन को महत्व देते हुए किसानों के आश्रयदाता बनते हुए अपने पुरुषार्थ से अपराजेय साम्राज्य का निर्माण किया। अपने राज्य में उन्होंने गोहत्या पर रोक लगा दी थी। महाराजा सूरजमल अपने समय से आगे की सोच रखते थे। इसीलिए जब भी वे युद्ध लड़े, दुश्मन सेना पर मानसिक दबाव बना कर अपनी चतुराई से सदा हावी रहे। वे 18वीं सदी के सबसे शक्तिशाली हिन्दू राजाओं में से एक थे। प्रजा-हित के साथ न्यायपूर्ण शासन के लिए भी वे विशेष रूप से जाने जाते थे। अपने जीवन काल में उन्होंने 80 युद्ध लड़े और कभी हार नहीं मानी।
उनके अधीन भरतपुर राज्य, आगरा, अलवर, अलीगढ़, धौलपुर, इटावा, हाथरस, मैनपुरी, मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा, रोहतक, सोनीपत, झज्जर, नूंह, पलवल, फरीदाबाद, कासगंज, फिरोजाबाद और बुलंदशहर के वर्तमान क्षेत्र आते थे।
(स्रोत : राजस्थान पत्रिका और विकीपीडिया)
जयन्ती पर उनको कोटिश: नमन !