06/10/2025
भारत के मुख्य न्यायाधीश तक सुरक्षित नहीं हैं, यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि हमारे संविधान की आत्मा पर प्रहार है। देश में संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है।
आज सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश माननीय बी.आर. गवई जी पर जूता फेंकने की घटना अत्यंत शर्मनाक, निंदनीय और लोकतंत्र की गरिमा पर सीधा आघात है।
यह हमला किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता, समानता, संवैधानिक मूल्यों और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी द्वारा प्रतिपादित न्याय के सिद्धांतों पर प्रहार है।
— क्या यह हमला इसलिए हुआ क्योंकि गवई साहब दलित समाज से आते हैं और आज देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन हैं?
यह जूता दरअसल उस न्यायिक व्यवस्था पर फेंका गया है, जो सदियों से वंचितों, शोषितों और आमजन को न्याय का विश्वास देती आई है।
यह घटना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह देश में बढ़ते नफ़रत के माहौल और संविधान विरोधी विचारधाराओं के बढ़ते साहस का भी गंभीर संकेत है जहाँ नफ़रत फैलाने वाले न संविधान का सम्मान करते हैं, न क़ानून का और न ही उन संस्थाओं का जो इनकी रक्षा के लिए खड़ी हैं।
जब देश का मुख्य न्यायाधीश भी जातिगत घृणा और वैचारिक द्वेष का शिकार बन सकते है, तो आम नागरिक, दलित समाज और कमजोर वर्गों की स्थिति कितनी असुरक्षित हो सकती है।