26/05/2025
आज यों ही मन हुआ कि मोबाइल की gallery को टटोला जाए। देखें, तो इस आधुनिक यंत्र ने हमारे किन किन क्षणों को संभाल कर रखा हुआ है.. टटोलने पर कुछ पुरानी तस्वीरें मिली, तो यकायक मेरा दिल उस पुराने समय में जा पहुंचा जहाँ मैंने, आपने, हम सभी ने कभी अपनी जिंदगी का सबसे अहम और खूबसूरत सा लम्हा जिया है - 'मथकुड़ी सैंण' । मन हुआ यदि वश में होता तो घड़ी की सुइयों से ठहर जाने की याचना करते और लौट आते उस बड़े से मैदान में, उस मैदान की उन सीढ़ियों में, उन कक्षाओं में। ले चलते अपने पुराने सहपाठियों को, अपने अध्यापकों को भी, और फिरसे दोहराते वह सब यादें जो अब बार बार हमें परेशान किया करती हैं। एक बार फिर समेट लेते उन तमाम एहसासों को, जो बस अब हमारे मोबाइल कि galleries में कहीं पड़ी हुईं हैं। और एक बार फिर से जी लेते अपनी असल जिंदगी को, जो अब कहीं बिखरी पड़ी है उस मैदान कि मिट्टी में, उन सीढ़ियों में, उन कक्षाओं कि दीवारों के कोनों में।