Smart Education Academy

Smart Education Academy The NATIONAL INSTITUTE OF COMPUTER EDUCATION (N.I.C.E)® (a unit of National Account and computer Education ) registered under the Public Charitable Trust a

16/07/2014

जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये !

आपने movies में कोई ऐसा scene ज़रूर देखा होगा जिसमे hero jail से भागने के लिए एक सुरंग बनाता है और finally उस जेल से फरार हो जाता है . काफी exciting होता है ये , नहीं !

पर आज मैं आपको खुद यही काम करने के लिए कह रहा हूँ …मैं आपको एक सुरंग बनाने के लिए कह रहा हूँ ..क्योकि आप भी अपनी life के hero हैं और unfortunately एक virtual jail में क़ैद हैं …एक ऐसी जेल जिसमे जाने से पहले आपको पता भी नहीं था की वो एक जेल है….. आप किसी ऐसी job , business या काम में फंस चुके हैं जो आपको बिलकुल पसंद नहीं है …कभी कभी तो आप frustrated feel करते हैं …क्योंकि आप यहाँ वो नहीं कर रहे होते जो आप सबसे अच्छे ढंग से कर सकते हैं …आप खुद इसे छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन financial obligations की वजह से छोड़ नहीं पाते..

मत accept करिए इस condition को , अपनी सुरंग बनाना शुरू करिए …अपने दिल का काम शुरू करिए …अगर नहीं पता कि वो क्या है तो उसे तलाशिये ….पर उस काम को ज़िन्दगी भर मत करिए जिसे आप पसंद नहीं करते …. जो आपको mediocre बनाता है .

कैसे बनाएं सुरंग ?

कैसे से ज्यादा ज़रूरी है की क्यों बनाएं … जेल में बहुत से कैदी होते हैं पर हीरो ही सुरंग क्यों बना पाता है , क्योंकि उसके सामने एक motive होता है , ये motive ही उसे इतना कठिन काम करने की inspiration देता है …आपका motive क्या है ??…क्या already आपके दिमाग में वो चीज है जो आप current job/ work को छोड़ कर करना चाहते हैं ? …अगर नहीं है तो इस बारे में सोचना बेकार है , ऐसे में अगर आप सुरंग बनाने में कामयाब हो भी जाते हैं तो पता है वो कहाँ निकलेगी ???

एक दूसरी जेल में !!

तो अगर आपको लगता है कि आप किसी जेल में बंद हैं तो सबसे पहले आपको जानना होगा कि यहाँ से निकल कर आप करना क्या चाहते हैं , what is that excites you, किस चीज को लेकर आप passionate हैं ?

ये कैसे पता करें ?

I really don’t know. पर मैंने कैसे किया ये आपको बता सकता हूँ . ACT करके .

मैंने अपनी life में बहुत experiments किये हैं .Job करने के साथ साथ मैंने NGO found की है , 2 साल तक slum dwellers के लिए school चलाया है , एक consultancy run की है , English में blog बनाया है ..और for last 2 and a half years AchhiKhabar.Com(AKC) run कर रहा हूँ ….क्योंकि यही वो चीज है जो मुझे सबसे ज्यादा excite करती है . मुझे इसी की तलाश थी .

Friends, most of us कभी न कभी किसी चीज को लेकर excite होते हैं …सपने बुनने लगते हैं …आपने लोगों को कहते सुना या खुद भी कहा होगा , “ मैं एक restaurant शुरू करने वाला हूँ ”, “ मैं एक xyz company डालने वाला हूँ …”, etc..but most of the people just talk, they don’t act.

अगर आपको अपना passion जानना है तो ACT करना होगा , जो चीज बहुत appeal करे उसे कर डालिए …don’t let the excitement die. कर के ही जाना जा सकता है की आप सचमुच उस काम के लिए बने हैं या नहीं .

अब लौट कर आते हैं अपने basic question पर , “कैसे बनाएं सुरंग ?”

हीरो क्या करता है ?… किसी औजार का प्रयोग करता है ….आपको भी कुछ ‘औजारों’ की ज़रुरत पड़ेगी और वो औजार हैं …आपकी skills, आपका knowledge. आप जो करना चाहते हैं उससे related knowledge और skills gather कीजिये .

उसके बाद औजार का प्रयोग करिए …. सिर्फ औजार हाथ में आ जाये और Hero उसे लेकर बैठा रहे तो क्या सुरंग बन पायेगी ? नहीं . आपको भी अपने औजारों को प्रयोग में लाना होगा . समय निकलना होगा.

हीरो सुरंग कब बनाता है …दिन में जब सब काम कर रहे होते हैं …नहीं , उस वक़्त तो वो भी काम करता है …आप भी उस वक़्त वही करिए जो आप कर रहे हैं …पर जिस वक़्त सब आराम कर रहे होते हैं …सो रहे होते हैं …मैच के मजे ले रहे होते हैं …facebook से चिपके हुए होते हैं ….. उस वक़्त आप अपनी सुरंग बनाइये …अपना काम करिए … ये आसान नहीं है …इसमें time लगेगा … साल -दो साल या फिर और , सुरंग एक दिन में नहीं बनती .. , …बहुत कुछ sacrifice करना होगा ….थक कर रुक जाने का दिल करेगा …पर आपको चलते रहेना होगा ….

और चलते -चलते एक दिन आ ही जायेगा जब आप जेल के बहार होंगे ….अपनी नयी दुनिया में , आज़ाद , अपने नए काम के साथ … खुशियाँ बटोरते …खुशियाँ लुटाते …

All the best! :)www.smartgroupsonline.com

16/07/2014

शोभित एक मेधावी छात्र था। उसने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में पूरे जिले में टॉप किया था। पर इस सफलता के बावजूद उसके माता-पिता उसे खुश नहीं थे। कारण था पढाई को लेकर उसका घमंड ओर अपने बड़ों से Inspirational Hindi Kahaniतमीज से बात न करना। वह अक्सर ही लोगों से ऊंची आवाज़ मे बात किया करता और अकारण ही उनका मजाक उड़ा देता। खैर दिन बीतते गए और देखते-देखते शोभित स्नातक भी हो गया।

स्नातक होने के बाद सोभित नौकरी की खोज में निकला| प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बावजूद उसका इंटरव्यू में चयन नहीं हो पाता था| शोभित को लगा था कि अच्छे अंक के दम पर उसे आसानी से नौकरी मिल जायेगी पर ऐसा हो न सका| काफी प्रयास के बाद भी वो सफल ना हो सका| हर बार उसका घमंड, बात करने का तरीका इंटरव्यू लेने वाले को अखर जाता और वो उसे ना लेते| निरंतर मिल रही असफलता से शोभित हताश हो चुका था , पर अभी भी उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे अपना व्यवहार बदलने की आवश्यता है।

एक दिन रस्ते में शोभित की मुलाकात अपने स्कूल के प्रिय अध्यापक से हो गयी| वह उन्हें बहुत मानता था ओर अध्यापक भी उससे बहुत स्नेह करते थे | सोभित ने अध्यापक को सारी बात बताई| चूँकि अध्यापक सोभित के वयवहार से परिचित थे, तो उन्होने कहा की कल तुम मेरे घर आना तब मैं तुम्हे इसका उपाय बताऊंगा|

शोभित अगले दिन मास्टर साहब के घर गया| मास्टर साहब घर पर चावल पका रहे थे| दोनों आपस में बात ही कर रहे थे की मास्टर साहब ने शोभित से कहा जाके देख के आओ की चावल पके की नहीं| शोभित अन्दर गया उसने अन्दर से ही कहा की सर चावल पक गए हैं, मैं गैस बंद कर देता हूँ| मास्टर साहब ने भी ऐसा ही करने को कहा|

अब सोभित और मास्टर साहब आमने सामने बैठे थे| मास्टर साहब शोभित की तरफ मुस्कुराते हर बोले –शोभित तुमने कैसे पता लगया की चावल पक गए हैं?

शोभित बोला ये तो बहुत आसान था| मैंने चावल का एक दाना उठाया और उसे चेक किया कि वो पका है कि नहीं ,वो पक चुका था तो मतलब चावल पक चुके हैं|

मास्टर जी गंभीर होते हुए बोले यही तुम्हारे असफल होने का कारण है|

शोभित उत्सुकता वश मास्टर जी की और देखने लगा|

मास्टर साहब समझाते हुए बोले की एक चावल के दाने ने पूरे चावल का हाल बयां कर दिया| सिर्फ एक चावल का दाना काफी है ये बताने को की अन्य चावल पके या नहीं| हो सकता है कुछ चावल न पके हों पर तुम उन्हें नहीं खोज सकते वो तो सिर्फ खाते वक्त ही अपना स्वाभाव बताएँगे|

इसी प्रकार मनुष्य कई गुणों से बना होता है, पढाई-लिखाई में अच्छा होना उन्ही गुणोँ में से एक है , पर इसके आलावा, अच्छा व्यवहार, बड़ों के प्रति सम्मान , छोटों की प्रति प्रेम , सकारात्मक दृष्टिकोण , ये भी मनुष्य के आवश्यक गुण हैं, और सिर्फ पढाई-लिखाई में अच्छा होना से कहीं ज्यादा ज़रुरी हैं।

तुमने अपना एक गुण तो पका लिया पर बाकियो की तऱफ ध्यान ही नहीं दिया। इसीलिए जब कोई इंटरव्यूवर तुम्हारा इंटरव्यू लेता है तो तुम उसे कहीं से पके और कहीं से कच्चे लगते हो , और अधपके चावलों की तरह ही कोई इस तरह के कैंडिडेट्स भी पसंद नही करता।

शोभित को अपनी गलती का अहसास हो चुका था| वो अब मास्टर जी के यहाँ से नयी एनर्जी ले के जा रहा था|

तो दोस्तों हमारे जीवन में भी कोई न कोई बुराई होती है, जो हो सकता है हमें खुद नज़र न आती हो पर सामने वाला बुराई तुरंत भाप लेता है| अतः हमें निरंतर यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे गुणों से बना चावल का एक-एक दाना अच्छी तरह से पका हो, ताकि कोई हमें कहीं से चखे उसे हमारे अन्दर पका हुआ दाना ही मिले।

15/07/2014

क्यों बचें Facebook से ? 7 reasons.
Facebook (Fb) world की दूसरी सबसे ज्यादा visit की जाने वाली site है …(पहली Google है ).

इसे बनाने वाले दुनिया के youngest billionaire Mark Zukerberg ने भी कभी नहीं सोचा था की ये इतनी जल्दी इतनी popular हो जाएगी . In fact , अगर आप Fb पे नहीं हैं तो लोग आपको आश्चर्य से देखते हैं . ..” Fb पे नहीं है ………….जी कैसे रहा है …… :) !!!” and all that.

आज Fb पे 1 billion+ registered user हैं, यानि दुनिया का हर सातवाँ आदमी Fb पे है and in all probability आप भी उन्ही में से एक होंगे . और शौक से Fb use करते होंगे . पर जो सोचने की बात है वो ये कि क्या आप Fb use करते ; overuse करते हैं …या फिर कहीं आप इसके addict तो नहीं !

Let’s say use करने का मतलब है कि आप Fb पर daily 1 घंटे से कम समय देते हैं , और overuse करने का मतलब है 1 घंटे से ज्यादा . और हाँ , use करने से बस ये मतलब नहीं है कि आप physically system के सामने या अपने smart phone को हाथ में लेकर use करते हैं even अगर आप Fb के बारे में सोचते हैं तो वो भी time usage में count होगा after all वो उतने देर के लिए आपका mind space occupy कर रहा है .

और अगर आप सोच रहे हैं कि कहीं मैं addict तो नहीं हूँ तो इन traits को देखिये , अगर ये आपमें हैं तो आप addict हो सकते हैं :

आप का दिमाग अकसर इसी बात में लगा रहता है कि आपकी पोस्ट की गयी चीजों पर क्या कमेंट आया होगा, कितने लोगों ने लाइक किया होगा.
आप बिना मतलब बार-बार फेसबुक स्क्रीन रिफ्रेश करते हैं कि कुछ नया दिख जाए.
अगर थोड़ी देर आपका internet नहीं चला तो आप updates चेक करने साइबर कैफे चले जाते हैं या दोस्त को फ़ोन करके पूछते हैं.
आप टॉयलेट में भी मोबाइल या लैपटॉप लेकर जाते हैं कि Fb use कर सकें
आप सोने जाने से पहले सभी को Good Night करते हैं और सुबह उठ कर सबसे पहले ये देखते हैं की आपकी गुड नाईट पर क्या reactions आये.
अब मैं आपको अपने usage के बारे में बताता हूँ , on an average मैं daily 10 minutes से भी कम Fb use करता हूँ including Fb के बारे में सोचने का time. हाँ, इसे आप under usage भी कह सकते हैं . :) In my opinion ideally Fb आधे घंटे से अधिक नहीं use करना चाहिए पर फिर भी मैंने over usage को 1 घंटे से ऊपर रखा है .

और अब आपकी बात करते हैं , आप कितनी देर Fb use करते हैं ?

Well, अगर ये daily 1/2 घंटे से अधिक है तो आप अपना time waste कर रहे हैं , unless until आप purposefully ऐसा कर रहे हैं . Purposefully means आप अपना बिज़नस प्रमोट कर रहे हैं, किसी social cause के लिए campaign चला रहे हैं या कोई और meaningful काम कर रहे हैं , इन cases में अपना टाइम देना worth है .

किस तरह के लोग Fb ज़रुरत से अधिक use करते हैं :

In my opinion :

• जिनके पास कोई meaningful goal नहीं है …… the wanderers

• जो लोगोंका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं करना चाहते हैं ….the attention seekers.

• जो अपनी life से अधिक दूसरों की life में interest रखते हैं …..the peepers

क्या नुकसान कर सकता है Facebook का over usage ?

इसकी लिस्ट तो बहुत लम्बी है लेकिन आज मैं आपके साथ 7 ऐसे points share कर रहा हूँ , तो आइये देखते हैं इन्हें :

1) आप unknowingly अपनी happiness का control दूसरों को दे देते हैं ?

कैसे ? दरअसल अब आपकी happiness इस बात पर depend करने लगती है कि Fb पे आपकी बातों , आपकी pics को कितने लोग like कर रहे हैं , कितने लोग उसपर comments कर रहे हैं …कैसे comments कर रहे हैं …etc. For instance आपने एक नई watch ली और उसकी photo post की …obviously आपको watch बहुत पसंद थी इसलिए आपने ली …पर जब Fb पे उसे अधिक लोग like नहीं करते और कोई उसका मज़ाक बना देता है तो आप दुखी हो जाते हैं . और उसका उल्टा भी सही है …आप को कोई चीज पसंद नहीं है पर बाकी लोग उसको अच्छा कह देते हैं तो आप खुश हो जाते हैं …so in a way आप अपनी happiness का control अपने Fb friends को दे देते हैं . मैं ये नहीं कहता कि ये सभी के साथ होता है पर इतना ज़रूर है कि हम कहीं न कहीं इन चीजों से affect होते हैं .

And over a long period of time ये छोटे छोटे इफेक्ट्स बड़े होते जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि हम अपना real self कहाँ छोड़ आये.

2) आपको दूसरों की blessings और अपनी shortcomings दिखाई देने लगती है ?

Fb पर लोग generally अपनी life की अच्छी अच्छी बातें ही share करते हैं …लोग अपने साथ हो रही अच्छी चीजें बताते हैं , उनके status कुछ ऐसे होते हैं “ My new machine” , “ Lost in London”..etc

In reality आप भी ऐसा ही करते हैं , पर अन्दर ही अन्दर आप अपनी असलीयत भी जानते हैं , पर दूसरों के case में आप वही देखते हैं जो वो आपको दिखाते हैं , आपको उनकी नई car नज़र आती है पर उसके साथ आने वाला EMI नहीं , आपको friend का swanky office तो दीखता है पर उसके साथ मिलने वाली tension नहीं . और ऐसा होने पर आप उनकी खुशियों को अपने ग़मों से compare करने लगते हैं और ultimately low feel करने लगते हैं .

Fb की वजह से depression में जाने वालों की संख्या दिन ब दिन बढती जा रही है , just beware कि आप भी इसके शिकार न हो जाएं .

3) Real Friends और relationships suffer करते हैं :

कई बार लोग बहुत proudly बताते हैं , “ Fb पे मेरे 500 friends हैं …” I am sure उनमे से आधे अगर सामने से गुजर जाएं तो वो उन्हें पहचान भी नहीं पायंगे . हकीकत में Fb पे हमारे friends कम और acquaintances ज्यादा होते हैं . खैर ये कोई खराब बात नहीं है …लेकिन अगर हम इन more or less fake relations को ज़रुरत से अधिक time देते हैं तो कहीं न कहीं हमें अपनी family और friends को जो time देना चाहिए उससे compromise करते हैं . I know हमारे close friends और relations भी Fb पे होते हैं , but frankly speaking Fb पर वो भी हमारे लिए आम लोगों की तरह हो जाते हैं , क्योंकि Fb तो एक भीड़ की तरह है …और भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता ….जो सामने पड़ा …like किया , comment दिया और आगे बढ़ गए ….individuals को attention देना ये Fb की आत्मा में ही नहीं है .

4) आप mainly addicts से communicate करने लगते हैं :

शायद आपने Pareto principle के बारे में सुना होगा …इस principle का कहना है कि 80% चीजों के लिए 20% चीजें जिम्मेदार होती हैं .

For eg. किसी company की 80 % sales 20% customers की वजह से होती है .

ऐसा ही कुछ Fb पे भी होता है …80% updates 20% लोगों द्वारा ही की जाती है …और आप बार बार उन्ही से linkup होते रहते हैं …and basically ये वही Addict kind of लोग होते हैं जो बस Fb से चिपके ही रहते हैं . और ऐसे लोगों से interact करना शायद ही कभी आपको काम की चीजें बता पाएं . ये mostly waste of time ही होता हैं .

5) आपको Socially active होने का भ्रम हो जाता है और reality इसके उलट होती है :

Facebook पे होने से कई लोग खुद को socially active समझने लगते हैं , और friends को hi -bye कर के अपना role पूरा समझ लेते हैं . धीरे -धीरे ये बिलकुल mechanical हो जाता है …आप Fb पे तो hi करते हैं लेकिन जब उसी दोस्त से college या office में मिलते हैं तो react भी नहीं करते …it is like आपकी online presence मायने रखती हो पर आपका खुद का मौजूद होना बेमानी हो .

और जब आप ऐसे behave करते हैं तो लोग आपको avoid करने लगते हैं और कहीं न कहीं आपको fake समझने लगते हैं . यानि आपको तो लगता है कि आप सबसे touch में हैं पर इसके उलट आप अपना touch खोते जाते हैं .

6) आपकी health पर बुरा असर पड़ता है :

Fb पर लगे रहने से आपको फिजिकल और मेंटल दोनों तरह की प्रॉब्लम हो सकती हैं. आपकी आँखें कमजोर पड़ सकती हैं, गलत posture में बैठने से आपको स्पॉन्डिलाइटिस हो सकता है . और डिप्रेशन में जाने का खतरा तो हमेशा ही बना रहता है.

7) आप अपनी life के सबसे energetic days lazy entertainment में लगा देते हैं :

Fb use करने वालों की demography देखी जाए तो इसे सबसे अधिक teens और twenties के young लोग use करते हैं . अगर आप इस age group से बाहर हैं तो ये point आपके लिए applicable नहीं है.

Teenage और twenties life का वो time होता है जब आपके अन्दर energy की कोई कमी नहीं होती …कभी सोचा है कि इस वक्त भगवान् आपको सबसे अधिक energy क्यों देते है ….क्योंकि ये हमारे life making years होते हैं ….इस समय आपके सामने करने को बहुत कुछ होता है …..पढाई का बोझ या घर की जिम्मेदारी उठाने का challenge…अपना career chose करने और competition beat करने की कशमकश …अपने दिल कि सुनकर कुछ कर गुजरने की चाहत …parents के सामने हाथ फैलाने की जगह उनका हाथ थामने कि जिद्द …और ये सब करने के लिए उर्जा चाहिए …energy चाहिए ; but unfortunately Fb का over usage करने वाले उसे गलत जगह invest करते हैं . जहाँ उनके पास करने को इतने ज़रूरी काम हैं वो एक कोने में बैठ कर , and in ,most of the cases लेट कर …अपनी life के ये energetic days एकदम unproductive चीज में लगा देते हैं .

Friends अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि Fb एक शोर -शाराबे से भरे mall की तरह है …यहाँ थोडा वक़्त बीतायेंगे तो अच्छा लगेगा लेकिन अगर वहीँ घर बना कर रहने लगेंगे तो आपकी ज़िन्दगी औरों की आवाज़ के शोर में बहरी हो जाएगी . उसे बहरा मत होने दीजिये ….अपना time अपनी energy कुछ बड़ा , कुछ valuable , कुछ शानदार करने में लगाइए और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके इस काम को सिर्फ आपके friends ही नही बल्कि पूरी दुनिया Like करेगी , और ऊपर वाला comment देगा , “gr8 job my son”

All the best!

15/07/2014
15/07/2014

.DVD का पूरा नाम क्या है?
(A)डिमांड व्हीडियो डिस्क (Demand Video Disc)
(B)डिजिटल व्होलेटिक डिस्क (Digital Volatile Disc)
(C)डिजिटल व्हायेबल डिस्क (Digitally Viable Disc)
(D)डिजिटल व्हर्सटाइल डिस्क (Digital Versatile Disc)

14/07/2014

Look at this series: 7, 10, 8, 11, 9, 12, ... What number should come next?

A. 7 B. 10
C. 12 D. 13

13/07/2014

Q . इनमें से कौन-सा फल `विटामिन सी` का सबसे अच्छा स्रोत है ?
A. आंवला
B. संतरा
C. मौसमी
D. माल्टा
कृप्या Best G. K. के लिए ये पेज लाईक करना ना भूले ¡॥¡

13/07/2014

अहमियत बीवी की!

सुबह उठ कर पत्नी को पुकारते हैं, सुनो चाय लाओ।

थोड़ी देर बाद फिर आवाज़, सुनो नाश्ता बनाओ।

क्या बात है, आज अभी तक अखबार नहीं आया।

जरा देखो तो, किसी ने दरवाजा खटखटाया।

अरे आज बाथरूम में साबुन नहीं है क्या?

देखो तो कितना गीला पड़ा है तौलिया।

अरे,ये शर्ट का बटन टूटा है, जरा लगा दो और मेरे मौजे कहाँ है, जरा ढूंढ के ला दो।

लंच के डिब्बे में आलू के परांठे दो ज्यादा रख देना।

देखो अलमारी पर कितनी धूल जमी पड़ी है, लगता है कई दिनों से डस्टिंग नही की है।

गमले में पौधे सूख रहे हैं, क्या पानी नहीं डालती हो? दिन भर करती ही क्या हो बस गप्पे मारती हो।

शाम को डोसा खाने का मूड है, बना देना।

बच्चों की परीक्षाएं आ रही हैं पढ़ा देना।

सुबह से शाम तक कर फरमाईशें कर नचाते हैं, चैन से सोने भी नहीं देते, सताते हैं।

दिनभर में बीवियां कितना काम करती हैं ये तब मालूम पड़ता है जब वो बीमार पड़ती हैं। एक दिन में घर अस्त व्यस्त हो जाता है, रोज का सारा रूटीन ही ध्वस्त हो जाता है। आटे दाल का सब भाव पता चल जाता है। बीवी की अहमियत क्या है, ये पता चल जाता है।

सभी बीवियों को सलाम।

12/07/2014

गुरु, गुरु ही होता है!
एक रात, चार कॉलेज विद्यार्थी देर तक मस्ती करते रहे और जब होश आया तो अगली सुबह होने वाली परीक्षा का भूत उनके सामने आकर खड़ा हो गया।

परीक्षा से बचने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई। मैकेनिकों जैसे गंदे और फटे पुराने कपड़े पहनकर वे प्रिंसिपल के सामने जा खड़े हुए और उन्हें अपनी दुर्दशा की जानकारी दी।

उन्होंने प्रिंसिपल को बताया कि कल रात वे चारों एक दोस्त की शादी में गए हुए थे। लौटते में गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया। किसी तरह धक्का लगा-लगाकर गाड़ी को यहां तक लाए हैं। इतनी थकान है कि बैठना भी संभव नहीं दिखता, पेपर हल करना तो दूर की बात है। यदि आप हम चारों की परीक्षा आज के बजाय किसी और दिन ले लें तो बड़ी मेहरबानी होगी।

प्रिंसिपल साहब बड़ी आसानी से मान गए। उन्होंने तीन दिन बाद का समय दिया। विद्यार्थियों ने प्रिंसिपल साहब को धन्यवाद दिया और जाकर परीक्षा की तैयारी में लग गए।

तीन दिन बाद जब वे परीक्षा देने पहुंचे तो प्रिंसिपल ने बताया कि यह विशेष परीक्षा केवल उन चारों के लिए ही आयोजित की गई है। चारों को अलग-अलग कमरों में बैठना होगा।

चारों विद्यार्थी अपने-अपने नियत कमरों में जाकर बैठ गए। जो प्रश्नपत्र उन्हें दिया गया उसमें केवल दो ही प्रश्न थे:

प्र.1 आपका नाम क्या है? (2 अंक)

प्र.2 गाड़ी का कौन सा टायर पंक्चर हुआ था? (98 अंक)

12/07/2014

सबसे कीमती चीज

एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए.

फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.

“अच्छा” उसने कहा,” अगर मैं ये कर दूं ? ” और उसने नोट को नीचे गिराकर पैरों से कुचलना शुरू कर दिया. उसने नोट उठाई , वह बिल्कुल चिमुड़ी और गन्दी हो गयी थी.

” क्या अभी भी कोई है जो इसे लेना चाहता है?”. और एक बार फिर हाथ उठने शुरू हो गए.

” दोस्तों , आप लोगों ने आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है. मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे क्योंकि ये सब होने के बावजूद नोट की कीमत घटी नहीं,उसका मूल्य अभी भी 500 था.

जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.

कभी भी बीते हुए कल की निराशा को आने वाले कल के सपनो को बर्बाद मत करने दीजिये. याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन.”

11/07/2014

टीवी के विज्ञापनों को देखकर कुछ निष्कर्ष निकाले गए हैं। जो आपके रूबरू हैं।

1. घोटालों से परेशान ना हों, Tata की चाय पीयें, इससे देश बदल जाएगा।

2. पानी की जगह Coca Cola और Pepsi पीयें और प्यास बुझायें।

3. Lifebuoy और Dettol 99.9% कीटाणु मारते है पर 0.1 % पुनः प्रजनन के लिए छोड़ ही देते हैं।

4. अगर आप Sprite पीते हैं तो लड़की पटाना आपके बाये हाथ का खेल है।

5. Saif Ali Khan और Kareena Kapoor ने शादी एक दुसरे के सिर का Dandruff देख कर की है।

6. किसी के Toothpaste में नमक है या नहीं, यह पूछने के लिए आप किसी के भी घर का बाथरूम तोड़ सकते हैं।

7. Mountain Dew पीकर पहाड़ से कूद जाइये, कुछ नहीं होगा।

8. Cadbury Dairy Milk Silk Chocolate खाएं कम और मुंह पर ज्यादा लगायें।

9. Happident चबाइए और बिजली का कनेक्शन कटवा लीजिये।

10. फल मंडी से ज्यादा फल आपके Shampoo में होते हैं।

11. अगर आपने घर में Asian Paint किया है तो आप दुनिया के सबसे Intelligent इंसान हैं।

12. अगर आपका बच्चा Bournvita नहीं पीता तो वो मंद बुद्धि माना जा सकता है।

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