08/06/2026
जब भी मैं अपने गांव जाता हूं, रास्ते में अक्सर कई शिक्षक और सरकारी कर्मचारी दोपहिया वाहन से घूमते हुए मिलते हैं।
वे पूछते हैं— "भाई साहब, यह गांव कहां पड़ेगा?"
"गूगल मैप में यह रास्ता दिख रहा है, क्या यहीं से जाना है?"
तब पता चलता है कि वे जनगणना या किसी अन्य सरकारी सर्वेक्षण की ड्यूटी पर हैं।
सच कहूं तो उन्हें देखकर दुःख होता है। एक तरफ 45-50 डिग्री की भीषण गर्मी,
दूसरी तरफ दूर-दराज़ के गांवों में घंटों की यात्रा, और ऊपर से अपने विभाग का काम छोड़कर अतिरिक्त जिम्मेदारी।
मैं उन कर्मचारियों और शिक्षकों के समर्पण को सलाम करता हूं,
#लेकिन_एक_सवाल_जरूर_पूछना_चाहता_हूं —
सरकार जनगणना के लिए कर्मचारियों को ढूंढ रही है, जबकि लाखों युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं! शिक्षकों को स्कूल से निकालो, विभागों का काम रोक दो, फिर बेरोजगारी पर चिंता जताओ — यह कैसी व्यवस्था है?
जनगणना का काम युवाओं को दो। उन्हें प्रशिक्षण दो, रोजगार दो, अनुभव दो।
देश के युवाओं को अवसर चाहिए, सहानुभूति नहीं। अगर आप मानते हैं कि जनगणना और ऐसे अस्थायी सरकारी कार्यों में बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, तो इस आवाज़ को आगे बढ़ाइए। जब देश में लाखों शिक्षित बेरोजगार युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो ऐसे कार्यों में उन्हें अवसर क्यों नहीं दिया जाता?
देश को आंकड़े भी मिलेंगे, युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियां भी नहीं झेलनी पड़ेंगी।
यह केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की उम्मीद है। 🇮🇳✊
#युवा_रोजगार
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