Kush/Ramsar Tirth- Kuchrana Kalan

Kush/Ramsar Tirth- Kuchrana Kalan Kush /Ramsar Tirth at Kuchrana Kalan distt-Jind haryana related to the Mahabharata period.

03/04/2025

कुश/रामसर तीर्थ कुचराना कलां, जींद
Kush/Ramsar Tirth- Kuchrana Kalan
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Devender Chaterbhuj Attri

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08/03/2025

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कुशावर्त/कुश तीर्थ का महाभारत के अनुशासन पर्व में स्नान के महत्व को दर्शाया गया है। इस तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य पा...
02/03/2025

कुशावर्त/कुश तीर्थ का महाभारत के अनुशासन पर्व में स्नान के महत्व को दर्शाया गया है। इस तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य पाप रहित होकर सीधे स्वर्गलोक को प्रस्थान करता है। महर्षी कुश ने इस तीर्थ पर कठोर तप करके स्वर्गलोक को प्राप्त किया था। यह तीर्थ वर्तमान में हरियाणा के जिला जींद के ऐतिहासिक गांव कुचराना कलां में स्थित है, जोकि महाभारत के 48 कोस परिक्रमा का हिस्सा है। यहां पर मृत्यु के पश्चात भी फूल गंगा मैया के अर्पण की जगह इसी तीर्थ में विसर्जित किए जाते हैं।
साभार
डॉ आज़ाद सिंह पुनिया
इतिहास विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़।

Rameshwar tirth Danoda Kalan
02/03/2025

Rameshwar tirth Danoda Kalan

लोकोद्धार नामक यह तीर्थ, जींद से लगभग 40 कि.मी. दूर लोधार ग्राम में स्थित है। इस तीर्थ का सम्बन्ध भगवान विष्णु से है क्य...
11/05/2024

लोकोद्धार नामक यह तीर्थ, जींद से लगभग 40 कि.मी. दूर लोधार ग्राम में स्थित है। इस तीर्थ का सम्बन्ध भगवान विष्णु से है क्योंकि वे तीनों लोकों का उद्धार करते हैं अतः इसका नाम लोकोद्धार तीर्थ पड़ा। महाभारत और वामन पुराण दोनो में इस तीर्थ का स्पष्ट उल्लेख है। महाभारत के अनुसार धर्म का तत्त्व जानने का इच्छुक श्रद्धालु इस तीर्थ में स्नान करकेे उपने आत्मीयजनांे का उद्धार करता है।
ततो गच्छेत् धर्मज्ञ तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम्।
लोका यत्रोद्धृताः पूर्वं विष्णुना प्रभविष्णुना।
लोकोद्धारं समासाद्य तीर्थं त्रैलोक्यपूजितम्।
स्नात्वातीर्थवरे राजन् स्नात्वा वै वंशमूलके।
(महाभारत, वन पर्व 83/44-45)
इसी प्रकार वामन पुराण में कहा है कि यहाँ स्नान करने एवं सनातन शिव को साष्टांग प्रणाम करने से मुक्ति प्राप्त होती है।
ततो गच्छेत् विप्रेन्द्रास्तीर्थं त्रैलोक्य विश्रुतम्।
लोका यत्रोद्धृताः सर्वे विष्णु प्रभविष्णुना।
लोकोद्धारं समासाद्य तीर्थस्मरणतत्परः।
स्नात्वा तीर्थवरे तस्मिन् लोकान् पश्यति शाश्वताम्।
यत्र विष्णु स्थितो नित्यं शिवो देवः सनातनः।
तौ देवौ प्रणिपातेन प्रसाद्य मुक्तिमाप्नुयात्।
(वामन पुराण 35/20-22)
अर्थात् हे धर्मतत्त्व के ज्ञाता! तत्पश्चात् तीनों लोकों में प्रसिद्ध उस तीर्थ का सेवन करना चाहिए जहाँ सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु ने अनेक लोकों का उद्धार किया था। त्रिलोक में पूजित इस तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य आत्मीयजनों का उद्धार करता है। यहाँ विष्णु एवं शिव निरंतर निवास करते हैं। इन दोनो देवों को प्रणाम करके उन्हे प्रसन्न किए जाने पर मनुष्य मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
जनश्रुति है कि यहाँ लौहऋषि ने भी तपस्या की थी उसी के कारण इस स्थान का नाम लौहगढ़ पड़ा कालान्तर में लोधर नाम से पुकारा जाने लगा। सोमवती अमावस्या को यहाँ पिण्ड दान किया जाता है और श्रद्धालु हर अमावस्या को यहाँ स्नान करने आते हैं।

मल्लिकेश्वर तीर्थ, ढाटरथ, जीन्दअपने सुनहरे अतीत को पहचानो 48 कोस कुरुक्षेत्र के जींद जिले के प्राचीन तीर्थ ।यह तीर्थ सरस...
07/05/2024

मल्लिकेश्वर तीर्थ, ढाटरथ, जीन्द

अपने सुनहरे अतीत को पहचानो
48 कोस कुरुक्षेत्र के जींद जिले के प्राचीन तीर्थ ।

यह तीर्थ सरस्वती की सहायक नदी दृषद्वती नदी के तट पर स्थित है।

लौकिक आख्यानों के अनुसार इस तीर्थ को मल्लिकेश्वर तीर्थ के नाम से जाना जाता है जो कि भगवान शिव का एक नाम माना जाता है।

• लोक कथाएँ इस तीर्थ का सम्बन्ध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन का रथ इस स्थान पर रोकने से जोड़ती हैं।

•एक अन्य लोक मान्यता के अनुसार यह गांव धृतराष्ट्र के नाम से पड़ा है।

• तीर्थ से कुषाण और गुप्त कालीन पुरावशेष मिले हैं। यहां से मिली एक 9-10वीं शती की गंगा की भग्न मूर्ति भी मिली है।
नोट- इस तीर्थ के बारे में कोई भी जानकारी हो तो कृप्या सांझा करे।
साभार
आज़ाद सिंह पूनिया
शोधकर्ता, पंजाब विश्विद्यालय, चण्डीगढ़।

48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि
06/04/2024

48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि

सूर्य कुण्ड तथा कुश तीर्थ
23/03/2024

सूर्य कुण्ड तथा कुश तीर्थ

17/03/2024

Greater Kurukshetra or 48 kos Kurukshetra Bhumi lies between the two rivers i.e. Sarasvati and Drishadvati which is spread over the five revenue districts of Haryana viz. Kurukshetra, Kaithal, Karnal, Jind and Panipat.

In the text of Mahabharata, Kurukshetra has been identified as Samantpanchaka consisting a land spreading over twenty yojana and lying between river Sarasvati on the north and Drishadvati on the south bounded by four door keepers or Yakshas at four cardinal corners viz., Ratnuk Yaksha at Bid Pipli (Kurukshetra) on the north-east, Arantuk Yaksha at Behar Jakh (Kaithal) on the north-west, Kapil Yaksha at Pokhari Kheri (Jind) on the south-west and Machakruka Yaksha at Sinkh (Panipat) on the south-east. Popularly the holy circuit of greater Kurukshetra is called 48 kos Kurukshetra Bhumi.

गाँव कुचराना कलां एक बहुत ही प्रचीन, एंव ऐतिहासिक गाँव है। जिसका संबंध रामायण, महाभारत एवम पुराण काल से जुड़ता है। किवदंत...
16/03/2024

गाँव कुचराना कलां एक बहुत ही प्रचीन, एंव ऐतिहासिक गाँव है। जिसका संबंध रामायण, महाभारत एवम पुराण काल से जुड़ता है। किवदंति है कि जब भगवान राम अयोध्या से रामराय जा रहे थे तो रास्ते में गाँव कुचराना कलां में स्थित "रामसर' तीर्थ के तालाब में, स्नान किया था जो आज भी ज्यों का त्यों है। इसी परकार दानोदा मैं स्थित रामसर तीर्थ भी एक अन्य महावपूर्ण तीर्थ इसी काल से संबंधित है।

महर्षि विश्वामित्र के दादा महर्षि कुश ने इस तीर्थ पर कठोर तपस्या की थी उनके नाम पर इस तीर्थ को कुश तीर्थ भी कहा जाता है तथा उनके नाम पर ही गांव का नाम कुचराना पड़ा। कुश तीर्थ स्थल का वर्णन कूर्म पुराण में भी मिलता है।

साभार
आज़ाद सिंह पूनिया
रिसर्च स्कॉलर, इतिहास विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़

कुश/रामसर तीर्थ, बाबा ब्रहमदास डेरा तथा शिव मंदिर कुचराना कलां||गांव के लोगो की मान्यता है की कुश/रामसर तीर्थ में प्राची...
11/03/2024

कुश/रामसर तीर्थ, बाबा ब्रहमदास डेरा तथा शिव मंदिर कुचराना कलां||
गांव के लोगो की मान्यता है की कुश/रामसर तीर्थ में प्राचीन काल की कांच की बनी हुई सीढियां हैं। इस तीर्थ का पानी कभी भी सूखता नहीं है। ब्रह्मऋषि विश्वामित्र के दादा महर्षि कुश की तपोस्थली कुश तीर्थ का वर्णन कूर्म पुराण में भी मिलता है जिन्होंने यहां पर काफ़ी लंबे समय तक तप किया था। जिसके नाम पर ही इस तीर्थ का नाम कुश व गांव का नाम कुचराना पड़ा है।

08/03/2024

कुचराना कलां में एक शानदार चौपाल का निर्माण वर्ष 2004 में किया गया था। इससे पहले की चौपाल काफी साल पुरानी व ऐतिहासिक महत्व की थी। लेकिन काफी जीर्ण शीर्ण होने के कारण उसकी जगह नई चौपाल का निर्माण करवाया गया। इसका उपयोग गांव में होने वाले सामाजिक, राजनीतिक व व्यक्तिगत कार्यकर्मों के लिए किया जाता है। हरियाणा में चौपाल में खाई गई कसम को सबसे बड़ा माना जाता है व लोग यहां पंचायत मैं जूठ बोलना महापाप मानते हैं।
इसके लिए पूरे पैसे का प्रबंध गांव के लोगो द्वारा ही किया गया था प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं की गई थी।
चौपाल का आर्किटेक्चर में मेहराब नुमा दरवाजों का प्रयोग किया गया है। इसको इस प्रकार से बनाया गया है की हवा हमेशा महसूस होती है।
मुख्य द्वार पर कमल का फूल सुशोभित है। साथ ही चौपाल के नीचे से गांव के अंदर एक मुख्य गली जाती है। चौपाल की छत से पूरे गांव के साथ साथ कुश/रामसर तीर्थ व बाबा बरहमदास का डेरा देखा जा सकता है।

साभार
आज़ाद सिंह पूनिया
पीएचडी, इतिहास विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़।

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