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आज की जीवन विद्या(21): नंबर वन होने की दौड़ ने किसको जोड़ा हैं ?नंबर वन होने की दौड़ ने सबको दौड़ा रखा है ,इस दौड़ में प...
06/10/2026

आज की जीवन विद्या(21): नंबर वन होने की दौड़ ने किसको जोड़ा हैं ?

नंबर वन होने की दौड़ ने सबको दौड़ा रखा है ,इस दौड़ में प्रथम आने के लिए दुनिया के कितने स्रोत खर्च हो रहे हैl सबसे आगे निकलना या उससे आगे रहना एक मनोरोग हैl इस प्रवृत्ति से मानवता का कितना नुकसान ,प्रकृति का कितना नुकसान हुआ है l विचरिए! प्रतियोगिता से प्रतिद्वंदिता बढ़ी है ,भाईचारा टूटा है ,प्रेम टूटा है l हर आदमी दूसरे से अपने को भिन्न इकाई मान बैठा है जबकि अस्तित्व सहयोग पर आधारित हैं l…...

नंबर वन होने की दौड़ ने सबको दौड़ा रखा है ,इस दौड़ में प्रथम आने के लिए दुनिया के कितने स्रोत खर्च हो रहे हैl सबसे आगे ....

आज की जीवन विद्या(20): संबंध में मधुरता कैसे लाएँ ?हमारा अधिकांश समय और प्रयास किधर लग रहा है ? सीधी सी बात है कि जिसने ...
03/10/2026

आज की जीवन विद्या(20): संबंध में मधुरता कैसे लाएँ ?

हमारा अधिकांश समय और प्रयास किधर लग रहा है ? सीधी सी बात है कि जिसने कभी गणित नहीं पढ़ा वो सीधी गणित की परीक्षा में फ़ेल ही होना हैl गणित के नियम जानकार उस अनुसार गणना करना ही सफलता हेतु जरूरी हैं l संबंध का विज्ञान हमनें नहीं पढ़ा ,इसलिए इसके बारे में नहीं जानते है l संबंध के नियम सीखना जरूरी हैं l संबंध भी किसी नियम से चलते हैं ,उनको सीख कर ही उनका पालन कर सकते हैं l भाव व्यवहार अच्छा करने हेतु, जीने हेतु संबंधों में जीने के नियम सीखना जरूरी हैं l संबंधों में मधुरता न्याय (Justice) को समझने और जीने से आती हैl संबंधो में भाव जैसे विश्वास,सम्मान ,स्नेह आदि का होना जरूरी हैं l

हमारा अधिकांश समय और प्रयास किधर लग रहा है ? सीधी सी बात है कि जिसने कभी गणित नहीं पढ़ा वो सीधी गणित की परीक्षा में फ़...

20/09/2026

आज की जीवन विद्या (19): हमारे फेफड़ों की सीमा कहाँ तक हैं ?

फेफड़ों से हम श्वास लेते है,इसमें नाक से ऑक्सिजन लेते हैं और कार्बन डाइ ऑक्साइड छोड़ते है ,जो हम छोड़ते है उसे पौधे लेते है और जो पौधे छोड़ते है उसे हम लेते है l इस तरह पूरा वनस्पति अवस्था तक फेफड़ों का विस्तार हो गया l क्या यह हमारा विस्तार नहीं हुआ ? इसी तरह जीवन में पानी का भी एक चक्र है ,बादलों से शुरू होकर नदियों से मनुष्य तक,फिर मनुष्य से प्रथ्वी ,वनस्पतियों से होता हुआ नदियों से समुद्र ,फिर वहाँ से बादलों तक जाता हैं l…...

आज की जीवन विद्या(18):कैसे सुने ?संवाद में निहित आवश्यक संदेश को पहचाने ,उसके पैकिंग मेटेरियल पर ध्यान न दे संवाद में दू...
18/09/2026

आज की जीवन विद्या(18):कैसे सुने ?

संवाद में निहित आवश्यक संदेश को पहचाने ,उसके पैकिंग मेटेरियल पर ध्यान न दे संवाद में दूसरे ने जो कहा उसकी need पहचान ले ,साथ में जो व्यर्थ में कहा उसे भूल जाएl वक्ता जो चाहता है ,उसे पकड़े, उसके भाव और शब्दों पर न जाए l जब हम आइसक्रीम खाते है तब तो रेपर चबा कर अपना मुंह खराब नहीं करते फिर संवाद में उसके शब्दों को,भावों को ,उसके व्यवहार को पकड़ कर चोट क्यों खाते है ?...

संवाद में निहित आवश्यक संदेश को पहचाने ,उसके पैकिंग मेटेरियल पर ध्यान न दे संवाद में दूसरे ने जो कहा उसकी need पहचान ल.....

आज की जीवन विद्या (17): जब दूसरा गुस्से में है तो क्या करें ?कल्पना कीजिए कि हम जब सड़क पर जा रहे हैं और कोई हमारे आगे क...
16/09/2026

आज की जीवन विद्या (17): जब दूसरा गुस्से में है तो क्या करें ?

कल्पना कीजिए कि हम जब सड़क पर जा रहे हैं और कोई हमारे आगे कार टकरा गई हो,भले तब हम नियमानुसार सही चल रहे हो तब भी ब्रेक लगा कर अपनी गाड़ी रोकते है ताकि हम उससे टकरा न जाए , स्वयं को रोक लेते है जिससे अपने हाथ पैर नहीं टूटे l संवाद के दौरान जब अगला आहत होकर परेशान है ,मानसिक दुर्घटना ग्रस्त है और क्रोध में हमको गाली देता है तब उस पर क्रोध करने से क्या होगा l तब अपने भाव को उससे बचाने की जरूरत है l क्या ऐसे में उस से गुस्सा कर उससे टकराने की जरूरत है ?...

कल्पना कीजिए कि हम जब सड़क पर जा रहे हैं और कोई हमारे आगे कार टकरा गई हो,भले तब हम नियमानुसार सही चल रहे हो तब भी ब्रे.....

आज कि जीवन विद्या (16): असली सम्मान क्या हैं ?युवा लोग जब पढ़ रहे होते है तो आईएएस बनना चाहते है ताकि लाल बत्ती वाली गाड...
31/08/2026

आज कि जीवन विद्या (16): असली सम्मान क्या हैं ?

युवा लोग जब पढ़ रहे होते है तो आईएएस बनना चाहते है ताकि लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम कर प्रभाव दिखा सके जिससे सम्मान मिले l आईएएस बनने पर इस तरह लाल बत्ती वाली गाड़ी सिर्फ सड़क पर नहीं दौड़ती है बल्कि लोगों के दिलों में दौड़ती हुई उन्हे घायल करती है l गाड़ी में घूमने वाला घाव देकर समझता है कि वह अपने घाव भर रहा है जबकि इससे घाव भरते नहीं है क्यूंकि असली सम्मान का पता ज्ञात नहीं है l घाव देना और घाव भरना दोनों का सम्मान से कोई लेना देना नहीं है l असली सम्मान सही मूल्यांकन , विश्वास और स्नेह से उपजता है l

युवा लोग जब पढ़ रहे होते है तो आईएएस बनना चाहते है ताकि लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम कर प्रभाव दिखा सके जिससे सम्मान...

30/08/2026

आज की जीवन विद्या (15): क्रोध क्या है ?

गुस्सा मन का वह तीव्र और उग्र भाव है जो असंतोष, अपमान, या इच्छाएं पूरी न होने पर उत्पन्न होता है। ए नागराज जी के शब्दों में "स्वयं की अक्षमता का प्रदर्शन ही क्रोध है।" क्रोध मेरी अयोग्यता / अक्षमता का प्रदर्शन है,अर्थात उक्त कार्य मैं शांति से सम्पन्न नहीं करा पा रहा हूँ l मैं अपने हिसाब से जब किसी को नहीं चला पाता हूँ तो उससे नाराज होकर आवेश में आकर अपना निर्णय उस पर थोपना क्रोध करना है l यह …...

24/08/2026

आज की जीवन विद्या(14): सुख और सुविधा में क्या अंतर है ?

जीवन विद्या के अनुसार, सुख और सुविधा के बीच का अंतर ही मानव जीवन की सबसे बड़ी समझ है। ये जीवन विद्या के आधार है l आज के समय में अधिकांश लोग ' साधनों से प्राप्त सुविधा' को ही 'सुख' मान लेते हैं, जिसके कारण वे सब सुविधा पाकर भी अतृप्त ही रहते हैं।चूंकि सुविधा से प्राप्त सुख स्थायी नहीं होता l…...

आज की जीवन विद्या (13): आज बुरी बात करने का फल चखा !पत्नी का बातों ही बातों में अपमान कर दिया lमकसद तो विद्या हेतु प्रेर...
22/08/2026

आज की जीवन विद्या (13): आज बुरी बात करने का फल चखा !

पत्नी का बातों ही बातों में अपमान कर दिया lमकसद तो विद्या हेतु प्रेरित करना था लेकिन वो तरीका गलत था l गलती तो संबंधों में कर दी ,अवमूल्यन व निर्मूल्यन कर उसका असम्मान किया l इस पर, वह बस नाराज हो गई कहने लगी, "मुझे मत बताओ जीवन विद्या ,स्वास्थ्य -सेतु वाले बड़े समझते है, उनके लिए लिखो l”...

पत्नी का बातों ही बातों में अपमान कर दिया lमकसद तो विद्या हेतु प्रेरित करना था लेकिन वो तरीका गलत था l गलती तो संबंधो....

आज की जीवन विद्या (12):दर्शन प्रणेता नागराज जी प्राय: आगन्तुकों से कहते थे कि अच्छी बात सुनाओ,इसके मायने क्या हैइस प्रका...
18/08/2026

आज की जीवन विद्या (12):दर्शन प्रणेता नागराज जी प्राय: आगन्तुकों से कहते थे कि अच्छी बात सुनाओ,इसके मायने क्या है

इस प्रकार बाबाजी हमें सकारात्मक भाव विचार में लाने हेतु अच्छी बातें करने के लिए प्रेरित करते थे ताकि व्यक्ति शुभ भाव में आ सके और उसकी मानसिकता में परिवर्तन हो। इससे वह बुराई, अशुभ भाव, और तनाव से बाहर आकर अपने दुख और नकारात्मकता को भूल सके। कुल मिलाकर, बाबाजी शुभ भाव विचार के लिए अच्छी बातों की महत्वपूर्णता पर बल देते थे ताकि आगंतुक की मन स्थिति शुभ हो जाए l

इस प्रकार बाबाजी हमें सकारात्मक भाव विचार में लाने हेतु अच्छी बातें करने के लिए प्रेरित करते थे ताकि व्यक्ति शुभ भ...

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