03/09/2026
गुर कीजै गहिला निगुरा न रहिला।
गुर बिन ग्यांन न पायला रे भाइला॥
दूधै धोया कोइला उजला न होइला।
कागा कंठै पहुप माल हंसला न भइला॥
आभा जैसी रोटली कागा ले जाइला।
पूछौं म्हारा गुरु नै कहां बैसि खाइला॥
उतर दिसि आविला पछिम दिस जाइला।
पूछौ म्हारा सतगुरु नै तिहां बैसि खाइला॥
चींटी केरा नेत्र मैं गज्येंद्र समाइला।
गावड़ी के मुख में बाघला बिवाइला॥
बारे बरसें बंझ ब्याई हाथ पाँव टूटा।
बदंत गोरखनाथ मछिंद्र ना पूता॥
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