Dr Kundan Chandrawat

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26/04/2026

जातिवादियों के ऊपर करारा तमाचा हिंदू हिंदू एक रहे भेदभाव को नहीं सहे...🙏🙏

क्या आपने ईश्वर को देखा है?" स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण परमहंस के बीच का प्रथम मिलन आध्यात्मिक इतिहास की सबसे क्र...
23/04/2026

क्या आपने ईश्वर को देखा है?"
स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण परमहंस के बीच का प्रथम मिलन आध्यात्मिक इतिहास की सबसे क्रांतिकारी घटनाओं में से एक माना जाता है। यह एक तर्कवादी युवक और एक सिद्ध संत के बीच का अद्भुत संवाद था।
1. वह ऐतिहासिक प्रश्न: "क्या आपने ईश्वर को देखा है?"
नवंबर 1881 में, जब नरेंद्र (विवेकानंद) कॉलेज के छात्र थे, वे मानसिक द्वंद्व से गुजर रहे थे। वे ब्रह्म समाज के अनुयायी थे और सत्य की खोज में कई विद्वानों के पास गए थे। उनका एक ही प्रश्न होता था— "क्या आपने ईश्वर को देखा है?"
ज्यादातर विद्वान इस पर दार्शनिक व्याख्याएँ देते, लेकिन किसी के पास सीधा उत्तर नहीं था। अंततः वे दक्षिणेश्वर मंदिर में रामकृष्ण परमहंस से मिलने पहुँचे।
संवाद:
नरेंद्र ने सीधे शब्दों में पूछा: "महाशय, क्या आपने ईश्वर को देखा है?"
रामकृष्ण ने बिना किसी झिझक के मुस्कुराते हुए उत्तर दिया:
"हाँ, मैंने देखा है। ठीक वैसे ही जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूँ, बल्कि उससे भी कहीं अधिक स्पष्ट रूप से। तुम चाहो तो मैं तुम्हें भी दिखा सकता हूँ।"
नरेंद्र दंग रह गए। पहली बार उन्हें कोई ऐसा मिला था जिसने दावे के साथ ईश्वर के अस्तित्व की गवाही दी थी।
2. वह अद्भुत स्पर्श (दिव्य अनुभूति)
अपनी दूसरी या तीसरी मुलाकात के दौरान, रामकृष्ण ने नरेंद्र की परीक्षा लेनी चाही और उन्हें अपनी आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव कराया।
रामकृष्ण ने अचानक अपना दाहिना पैर नरेंद्र के शरीर पर रख दिया। नरेंद्र ने बाद में बताया कि उस स्पर्श के होते ही उन्हें ऐसा लगा जैसे:
* कमरे की दीवारें गायब हो रही हैं।
* पूरी सृष्टि शून्य में विलीन हो रही है।
* उनका 'मैं' (अहंकार) मिटता जा रहा है।
घबराकर नरेंद्र चिल्लाए, "ओह! आप यह क्या कर रहे हैं? मेरे माता-पिता अभी जीवित हैं, मुझे अभी घर जाना है!"
रामकृष्ण हंसे और स्पर्श हटा लिया। उन्होंने कहा, "ठीक है, अभी रहने दो। समय आने पर यह सब अपने आप होगा।"
3. नरेंद्र की परीक्षा: जब दक्षिणेश्वर में गरीबी ने घेरा
एक समय ऐसा आया जब नरेंद्र के पिता का देहांत हो गया और परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया। नरेंद्र ने रामकृष्ण से कहा, "आप माँ काली से कहें कि हमारे घर की गरीबी दूर कर दें।"
रामकृष्ण ने कहा, "तू खुद क्यों नहीं मांग लेता? जा, आज माँ प्रसन्न हैं, जो मांगेगा वो मिलेगा।"
नरेंद्र तीन बार मंदिर गए, लेकिन हर बार जैसे ही माँ की प्रतिमा के सामने खड़े होते, वे घर के चावल-दाल और पैसों के बारे में भूल जाते। वे केवल 'ज्ञान, भक्ति और वैराग्य' मांगकर वापस आ जाते।
अंत में रामकृष्ण ने हंसते हुए कहा, "तुझे संसार के सुखों के लिए बनाया ही नहीं गया है, तू तो जगत के कल्याण के लिए है

विवेकानंद और रामकृष्ण का रिश्ता तर्क और अनुभूति का मिलन था। रामकृष्ण ने कभी नहीं कहा कि "मुझ पर अंधविश्वास करो," बल्कि उन्होंने नरेंद्र को सत्य का अनुभव करने की चुनौती दी।

02/04/2026

मुझे पूरा विश्वास है कि जो अमेरिका ने आरम्भ किया है उसे समाप्त किए बिना वापस नहीं जाएगा। यह कोई साधारण युद्ध नहीं है। यह सभ्यताओं का युद्ध है। इस युद्ध का अंत तबतक नहीं होना चाहिए जब तक ईरान की मुल्ला सरकार समाप्त नहीं हो जाती। इस युद्ध को अनिर्णीत छोड़कर यदि अमेरिका चला गया तो यह पश्चिमी सभ्यता , गल्फ देशों तथा अमेरिका और इजरायल के लिए सामूहिक आत्महत्या साबित होगा।

इतनी बर्बादी के पश्चात भी मुल्ला ईरान का घमंड और दृढ़ता बहुत चेतावनी देने वाली है। एक घायल सांप को तब तक नहीं छोड़ा जाता जब तक उसके फन को पूरी तरह कुचल न दिया जाए। घायल सांप कितना खतरनाक साबित हो सकता है यह बात अमेरिका अच्छी तरह जानता होगा , होगा क्या जानता है।

मुल्ला ईरान जितना अधिक संघर्ष कर रहा है उतना ही अधिक उसे कुचलना आवश्यक है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों को यह काम दशकों पहले कर देना चाहिए था। किंतु उन्होंने डील कर मुल्ला ईरान को 170 बिलियन डॉलर थमा दिए। जिसका उपयोग मुल्ला ईरान ने मिसाइल , ड्रोन , यूरेनियम संवर्धित करने में तथा हुती,हमास और हिजबुल्ला को मजबूत करने में खर्च किए।

मुल्ला ईरान सामान्य राष्ट्र नहीं है। कट्टरवादी धर्म शासित परमाणु हथियार सम्पन्न मुल्ला ईरान मानवीय सभ्यता के लिए एक निश्चित खतरा है। यह नॉर्थ कोरिया नहीं है कि परमाणु बनाकर चुपचाप बैठा रहेगा।

जिस दिन मुल्ला ईरान के पास परमाणु हथियार आए उस दिन उसे एक घंटा भी नहीं लगेगा और गल्फ देश तथा इजरायल पर वह इन हथियारों से हमला कर देगा।

मानव सभ्यता को सुरक्षित रखने के लिए यह एक आवश्यक युद्ध है और नेतृत्व परिवर्तन वैकल्पिक नहीं अपरिहार्य है।

जो लोग कहते हैं कि ईरान से हमारा हजारों साल पुराना सांस्कृतिक , व्यापारिक सम्बन्ध हैं वे यह जान लें कि वह कट्टरपंथी देश है। बेहतर होगा कि लोग अपने भ्रम से बाहर आ जाएं।

हम सभी लोगों को इस युद्ध में बिना झिझके अमेरिका, इजरायल और गल्फ देशों का समर्थन करना चाहिए।

25/02/2026

SC/ST आरक्षण मे क्रीमीलेयर लागू करे Amit Shah जी ताकि गरीब बंधूओ को इसका लाभ मिल सके
"राष्ट्रवादी दलित चिंतक"

20/02/2026

जातिवादी मेरिट धारी गलगोटियों ने पूरे विश्व मे भारत की छवि का गला घोट दिया...🧐🧐
"जमूरो बजाओ ताली"

19/02/2026

तंबू मे बैठे राम जी को जिसने स-सम्मान मंदिर मे विराजमान कराया मरते दम तक उसके साथ रहेंगे...🙏
Amit Shah
Dr Mohan Yadav
BJPBJP

04/02/2026

हिंदू हिंदू एक रहे भेदभाव को नहीं सहे...🙏

02/02/2026

UGC कानून के विरोध में देख लो इन जातिवादियों का नंगा नाच देश के प्रधानमंत्री को गाली बक रहे हैं हमारे दलित पिछड़े लोगों की दुकान में तोड़फोड़ मचा रहे हैं महिलाओं से अभद्रता कर रहे हैं सोचो जब संविधान नहीं होगा तब यह लोग कितने नंगे होकर नाचेंगे "जागो बंधूओ जागो"

01/02/2026

सरकार को इन जातिवादी ब्लैकमेलरो से डरना नही चाहिए पूरे दलित/पिछड़े सरकार के साथ है...🙏
"अगली बार 400 पार"

01/02/2026

जातिवादियो को रोहित वेमुला और पायल तडवी की मौत का कोई दुख नही केवल अपनी जात के बच्चो कि चिंता है 🧐
"दोगले जातिवादी"

31/01/2026

कितने शातिर है यह जातिवादी एक भी नही कह रहा कि भेदभाव खत्म करो सब कह रहे है कानून खत्म करो...🧐

यह भारत की गौरवमयी सनातनी परंपरा है की सत्ता हमेशा संतों के चरणों में झुकती आई है और संतों ने हमेशा सत्ता को धर्म पथ पर ...
23/01/2026

यह भारत की गौरवमयी सनातनी परंपरा है की सत्ता हमेशा संतों के चरणों में झुकती आई है और संतों ने हमेशा सत्ता को धर्म पथ पर चलने का मार्गदर्शन किया है...🙏🙏
Madhya Pradesh Modi Mohan Yadav Minister Office Uttar Pradesh

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