05/02/2024
मैं हूँ तो समय मेरे साथ
मैं हूँ तो अन्य मेरे साथ।
मैं हूँ तो ब्रह्मांड है मेरा
चांद तारे सूरज बादल
हवाएं फिजाए निगाहे
झरना की कलकल
नदी की हलचल
समुंदर की न सीमा
चलता रहता जैसे पानी
मैं हूँ तो सब कुश है मेरा दे
ये पहाड़
ये हरियाली
ये धरती पर लाली
ये फोलू की खुशबू
ये पेड़ो की डाली
ये सावन
ये धारती की सुंदरता
ये छाव ये धूप
ये जीवन ये रूप
सब खुश है मेरा
मैं हूँ तो
ये सूरज चांद
ये दीप का प्रकाश
है मेरा
मैं नहीं तो फिर *सेवक*
ये अंधेरा है मेरा
मैं नहीं तो
कुश भी नहीं है मेरा
कुश भी नहीं है मेरा
प्रकाश आहूजा" सेवक"