18/03/2026
एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला
“स्टार्टअप युग में साहित्यिक नवाचार”
दिनांक 16 मार्च 2026 को हिंदी विभाग, सरकारी विनयन, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, उमरपाड़ा, सूरत (गुजरात) के तत्वावधान में “स्टार्टअप युग में साहित्यिक नवाचार” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में साहित्य लेखन के नए आयामों, तकनीकी हस्तक्षेपों तथा रचनात्मकता के नवोन्मेषी स्वरूपों पर गंभीर विमर्श करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. नवीन सिंह (सहायक आचार्य, हिंदी, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर) ने अपने व्याख्यान में स्टार्टअप युग में साहित्य के बदलते स्वरूप, डिजिटल मंचों की भूमिका तथा नवोदित लेखकों के लिए उपलब्ध अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का समय केवल सृजन का नहीं, बल्कि प्रस्तुतीकरण और विपणन कौशल का भी है, जहाँ लेखक को अपने विचारों को नवीन माध्यमों के अनुरूप ढालना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एस. जी. बागुल ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में इस प्रकार की कार्यशालाओं की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नए दृष्टिकोण विकसित करने का सशक्त मंच है।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. कृष्ण देव तिवारी (IQAC) एवं सह-संयोजक डॉ. सुबोध ठाकुर के कुशल मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन किया गया। विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने साहित्य लेखन में नवाचार, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्लॉगिंग, कंटेंट क्रिएशन, और स्टार्टअप संस्कृति के प्रभाव जैसे विषयों पर सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला में आए विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक आयोजनों के माध्यम से ज्ञान-विस्तार के प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
निष्कर्षतः, यह कार्यशाला साहित्य और नवाचार के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण सिद्ध हुई, जिसने प्रतिभागियों को नई सोच, नई दिशा और सृजन के आधुनिक आयामों से परिचित कराया।