Vipra Goyal

Vipra Goyal सीईओ, एपएफ़ (मिशन आत्मनिर्भर भारत)
पूर्व सलाहकार, भारत सरकार, भारत सरकार
द्वारा गठित कमेटी के सदस्य

विप्र गोयल जो कि अक्षवि अवेयर (आईआईटी खड़गपुर) के निदेशक हैं। इन्होने भारत के नीति आयोग (योजना आयोग) में इंटर्नशिप की है। भारत के अंतरिक्ष व सेटेलाईट अनुसंधान केंद्र, भाभा परमाणु अनुसनधान केंद्र, ग्रामीण व पंचायती राज मंत्रालय। इत्यादि के साथ वार्तालापें की हैं। गुजरात, राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों का दौरा किया है। राजस्थान राज्य के साथ-साथ पूरे भारत के लिए पानी, बिजली, कृषि

, मवेशी, कृषि उद्योग व रोजगार की समुचित व्यवस्था का एक रणनीतिक प्लान तैयार किया है। बाहर अमेरिका और आस्ट्रेलिया अपना पेपर प्रजेंट किया है। और अब राजस्थान राज्य में पानी, बिजली, दूध, गैस, खाद, चारा और रोजगारों की समुचित व्यवस्था हेतु ग्राम-ग्राम की नीड असेसमेंट रिपोर्ट तैयार करने के कार्य में संलग्न हैं ।

Vipra Goyal is a post-graduate from IIT Kharagpur in Economics and Mathematics & Computing. He has received various trainings and conducted seminars in prominent institutions like NITI Aayog, Department of Atomic Energy, ISRO, DRDO, Stanford and World Bank. He has also conducted numerous press conferences at state & national level in West Bengal, Rajasthan and Gujarat and also presented papers in various international conferences. Vipra Goyal is on a mission of creating 2 crore Jobs and a 5.6 lakh crore rural economy in Rajasthan through his campaign - “आपणी ग्राम पंचायत आपणों विकास” which includes watershed development, setting up of food-dairy processing centers, biogas plants, etc. Recently he is working on a model Gram Panchayat named Chareda in Nangal Rajawatan, Dausa.

🌊 राजस्थान के मरुस्थल में हिमालयी जल की गंगा बहाने की सौगात 🇮🇳आप जो नक्शा देख रहे हैं, वह प्रस्तावित यमुना–राजस्थान–साबर...
26/05/2026

🌊 राजस्थान के मरुस्थल में हिमालयी जल की गंगा बहाने की सौगात 🇮🇳

आप जो नक्शा देख रहे हैं, वह प्रस्तावित यमुना–राजस्थान–साबरमती नहर लिंक परियोजना का नक्शा है।

📌 यह लगभग ₹20,000 करोड़ की अनुमानित लागत से प्रस्तावित एक ऐतिहासिक परियोजना है।

📖 परियोजना की समयरेखा:
• 1972 — परियोजना की प्रारंभिक अवधारणा प्रस्तुत की गई
• 1994 — सभी अंतर्राज्यीय समझौते पूर्ण हुए
• 1999 — राष्ट्रीय स्तर पर परियोजना की शुरुआत एवं राजनीतिक चर्चाएँ प्रारंभ हुईं
• प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट, DPR एवं तकनीकी अध्ययन पूर्ण किए गए

⚠️ इसके बावजूद, लगभग 20 वर्षों की देरी के कारण राजस्थान के शेखावाटी एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों को आज तक हिमालयी नदियों का पानी नहीं मिल पाया है।

📍 प्रमुख लाभान्वित होने वाले जिले:
• चूरू
• झुंझुनूं
• सीकर
• जोधपुर
• जैसलमेर
• बीकानेर
• बाड़मेर
• नागौर
• पाली
• सिरोही
• जालौर

🌱 यदि यह परियोजना लागू होती है, तो राजस्थान को निम्नलिखित परिवर्तनकारी लाभ प्राप्त हो सकते हैं:

✅ लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि को बारहमासी सिंचाई सुविधा

✅ लगभग 40 लाख लोगों को आजीविका समर्थन

✅ लगभग 30–40 लाख पशुओं के लिए वभर पानी एवं चारे की उपलब्धता

✅ लगभग 30–40 लाख पशुधन को मजबूरी में बिक्री/वध से संरक्षण

✅ जल संकट के कारण किसानों द्वारा भूमि बेचने की मजबूरी से लगभग 8 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सुरक्षा

✅ राजस्थान एवं भारत की GDP में लगभग ₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक की संभावित वृद्धि

✅ गाँवों में पेयजल एवं सिंचाई हेतु बारहमासी हिमालयी जल की उपलब्धता

⚠️ जागरूकता की कमी इस परियोजना के अनिश्चितकालीन विलंब का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।

🇮🇳 जय हिन्द

Address

C-199/A, 80 Feet Road, Mahesh Nagar, Jaipur

302015

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