26/05/2026
🌊 राजस्थान के मरुस्थल में हिमालयी जल की गंगा बहाने की सौगात 🇮🇳
आप जो नक्शा देख रहे हैं, वह प्रस्तावित यमुना–राजस्थान–साबरमती नहर लिंक परियोजना का नक्शा है।
📌 यह लगभग ₹20,000 करोड़ की अनुमानित लागत से प्रस्तावित एक ऐतिहासिक परियोजना है।
📖 परियोजना की समयरेखा:
• 1972 — परियोजना की प्रारंभिक अवधारणा प्रस्तुत की गई
• 1994 — सभी अंतर्राज्यीय समझौते पूर्ण हुए
• 1999 — राष्ट्रीय स्तर पर परियोजना की शुरुआत एवं राजनीतिक चर्चाएँ प्रारंभ हुईं
• प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट, DPR एवं तकनीकी अध्ययन पूर्ण किए गए
⚠️ इसके बावजूद, लगभग 20 वर्षों की देरी के कारण राजस्थान के शेखावाटी एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों को आज तक हिमालयी नदियों का पानी नहीं मिल पाया है।
📍 प्रमुख लाभान्वित होने वाले जिले:
• चूरू
• झुंझुनूं
• सीकर
• जोधपुर
• जैसलमेर
• बीकानेर
• बाड़मेर
• नागौर
• पाली
• सिरोही
• जालौर
🌱 यदि यह परियोजना लागू होती है, तो राजस्थान को निम्नलिखित परिवर्तनकारी लाभ प्राप्त हो सकते हैं:
✅ लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि को बारहमासी सिंचाई सुविधा
✅ लगभग 40 लाख लोगों को आजीविका समर्थन
✅ लगभग 30–40 लाख पशुओं के लिए वभर पानी एवं चारे की उपलब्धता
✅ लगभग 30–40 लाख पशुधन को मजबूरी में बिक्री/वध से संरक्षण
✅ जल संकट के कारण किसानों द्वारा भूमि बेचने की मजबूरी से लगभग 8 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सुरक्षा
✅ राजस्थान एवं भारत की GDP में लगभग ₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक की संभावित वृद्धि
✅ गाँवों में पेयजल एवं सिंचाई हेतु बारहमासी हिमालयी जल की उपलब्धता
⚠️ जागरूकता की कमी इस परियोजना के अनिश्चितकालीन विलंब का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।
🇮🇳 जय हिन्द