29/08/2024
जनसंगठन गाँव बचाओ आंदोलन के सत्याग्रहियों ने जनता की आवाज़ को दबा रहे भ्रष्ट अधिकारिओं पर व्यक्तिगत वाद दायर करने की दी पूर्व सूचना
जय हिन्द साथियों !
जनसंगठन गाँव बचाओ आंदोलन ने 18 जून 2024 को जब पेयजल एवं जल जीवन मिशन योजना में हुई अनियमितताओं, धांधलियों, घोटालो और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक, पूर्णतः गैर-राजनितिक गाँधीवादी धरना-सत्याग्रह शुरू किया था, उसी दिन लिखित रूप में ज़िला प्रशासन उत्तरकाशी से छायादार धरना स्थल की माँग भी की थी। ज़िला प्रशासन उत्तरकाशी द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ऑडिटोरियम के सामने का छायादार आँगन धरना-सत्याग्रह के लिए मुहैया भी करवा दिया गया था। जनसंगठन गाँव बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में 56 दिनों तक शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक, पूर्णतः गैर-राजनितिक गाँधीवादी धरना-सत्याग्रह इसी स्थान पर चलता भी रहा। लेकिन, जब पेयजल एवं जल जीवन मिशन में हुई अनियमितताओं, धांधलियों, घोटालो और भ्रष्टाचार के शिकार हुए पीड़ित गाँवो की संख्या 37 तक पहुँच गई। साथ ही उत्तरकाशी जनपद के विभिन्न स्थानों- धौंतरी उप तहसील परिसर,डुण्डा तहसील परिसर में भी जनसंगठन गाँव बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में कई गाँवों के ग्रामीणों ने अपनी पेयजल समस्या एवं जल जीवन मिशन योजना में हुई अनियमितताओं, धांधलियों, घोटालो और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण,अहिंसात्मक, पूर्णतः गैर-राजनितिक गाँधीवादी धरना-सत्याग्रह शुरू कर दिया तो फिर ज़िला प्रशासन उत्तरकाशी के उच्च अधिकारियों को यह लगने लगा कि अब भ्रष्टाचार से पर्दा उठ ही जायेगा और बहुत से अधिकारी सस्पेंड होंगे तथा कइयों की नौकरियां भी जाएंगी। तब ज़िला प्रशासन उत्तरकाशी अपनी दमनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी।
इसी के तहत 12 अगस्त 2024, श्रावण मास के अंतिम सोमवार (जिस दिन अधिकांश धरना सत्याग्रहियों का सोमवार का व्रत भी था) को आनन-फानन में ग़लत और झूठी धाराओं के तहत ज़िला अधिकारी की शह पर उप ज़िला अधिकारी भटवाड़ी द्वारा 24 सत्याग्रहियों को दिन में 3 बजे अवैध गिरफ़्तार कर लिया जाता है और पुलिस हिरासत में रखा गया। जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल थीं। लेकिन, जब अधिकारिओं को अपने सस्पेंड होने और नौकरी जाने का भय सताने लगा तब रात 12 बजे एसडीएम भटवाड़ी ने अपना न्यायालय खुलवाया और बिना किसी मुचल्के और बिना किसी ज़मानती के सभी के सभी 24 सत्याग्रहियों को छोड़ दिया। यहाँ पर गौर करने की बात है कि इन चुनिंदा भ्रष्ट अधिकारियों ने हमारी माता-बहनों को बिना किसी वज़ह के सूर्यास्त के बाद भी रात 12-1 बजे तक गैर कानूनी रूप से अवैध हिरासत में रखा। लेकिन ना ही किसी अधिकारी पर कोई कार्यवाही हुई और ना ही कोई अधिकारी सस्पेंड हुआ।
लेकिन,ज़िला प्रशासन उत्तरकाशी तब जनता की भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उठ रही आवाज़ को दबाने के लिए अन्य रास्ते ढूंढने लगा। अगले दिन 13 अगस्त 2024 से प्रतिदिन ज़िला प्रशासन उत्तरकाशी ऑडिटोरियम के सामने के छायादार आँगन में कोई न कोई वाहन खड़ा करवा रहा है ताकि बैठने की जगह न मिलने पर ग्रामीण सत्याग्रही धूप और बारिश से परेशान होकर अपना धरना-सत्याग्रह समाप्त कर दें और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उठ रही आवाज़ ना उठ सके।
अब एक प्रश्न आप सबसे है क्या आप लोग अपने गाँवों और जनपद में हो रहे इस भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ना नहीं चाहेंगे या इसी तरह मूकदर्शक बनकर केवल फेसबुक और व्हट्स एप पर ही समर्थन देंगे??
इसका ज़वाब आप सभी को अपनी अंतर-आत्मा को देना है।