Jeevan Mantra

Jeevan Mantra Some useful tips of life

*तस्मात् सर्वेषु भूतेषु दयां कुरुत सौहृदम्।**भावमासुरमुन्मुच्य यया तुष्यत्यधोक्षज:।।२४।।**तुष्टे च तत्र किमलभ्यमनन्त आद्...
10/03/2023

*तस्मात् सर्वेषु भूतेषु दयां कुरुत सौहृदम्।*
*भावमासुरमुन्मुच्य यया तुष्यत्यधोक्षज:।।२४।।*
*तुष्टे च तत्र किमलभ्यमनन्त आद्ये*
*किं तैर् गुण व्यतिकरादिह ये स्वसिद्धा:।*
*धर्मादय: किमगुणेन च काङ्‌क्षितेन*
*सारं जुषां चरणयोरुपगायतां न:।।२५।।*
( श्रीमद्भागवत महापुराण ७ /६)

प्रहलाद जी बालकों से कहते हैं- तुम लोग अपने दैत्यपन का, आसुरी सम्पत्ति का त्याग करके समस्त प्राणियों पर दया करो। प्रेम से उनकी भलाई करो। इसी से भगवान् प्रसन्न होते हैं।
आदि नारायण अनन्त भगवान् के प्रसन्न हो जाने पर ऐसी कौन-सी वस्तु है, जो नहीं मिल जाती? लोक और परलोक के लिये जिन धर्म, अर्थ आदि की आवश्यकता बतलायी जाती है- वे तो गुणों के परिणाम से बिना प्रयास के स्वयं ही मिलने वाले हैं।

जब हम श्रीभगवान् के चरणामृत का सेवन करने (चरणों में मन को समर्पित करने) और उनके नाम-गुणों का कीर्तन करने में लगे हैं, तब हमें मोक्ष की भी क्या आवश्यकता है।

जय श्री राधे कृष्णा

06/09/2020

*🌹पितरों के समान हैं ये 3 वृक्ष, 3 पक्षी, 3 पशु और 3 जलचर🌹*
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*⭕धर्मशास्त्रों अनुसार पितरों का पितृलोक चंद्रमा के उर्ध्वभाग में माना गया है। दूसरी ओर अग्निहोत्र कर्म से आकाश मंडल के समस्त पक्षी भी तृप्त होते हैं। पक्षियों के लोक को भी पितृलोक कहा जाता है। तीसरी ओर कुछ पितर हमारे वरुणदेव का आश्रय लेते हैं और वरुणदेव जल के देवता हैं। अत: पितरों की स्थिति जल में भी बताई गई है।* =================================

*⚜️तीन वृक्ष:-*
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*🚩1. पीपल का वृक्ष :-* पीपल का वृक्ष बहुत पवित्र है। एक ओर इसमें जहां विष्णु का निवास है वहीं यह वृक्ष रूप में पितृदेव है। पितृ पक्ष में इसकी उपासना करना या इसे लगाना विशेष शुभ होता है।

*🚩2. बरगद का वृक्ष :-* बरगद के वृक्ष में साक्षात शिव निवास करते हैं। अगर ऐसा लगता है कि पितरों की मुक्ति नहीं हुई है तो बरगद के नीचे बैठकर शिव जी की पूजा करनी चाहिए।

*🚩3. बेल का वृक्ष :-* यदि पितृ पक्ष में शिवजी को अत्यंत प्रिय बेल का वृक्ष लगाया जाय तो अतृप्त आत्मा को शान्ति मिलती है। अमावस्या के दिन शिव जी को बेल पत्र और गंगाजल अर्पित करने से सभी पितरों को मुक्ति मिलती है।...इसके अलावा अशोक, तुलसी, शमी और केल के वृक्ष की भी पूजा करना चाहिए।
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*⚜️तीन पक्षी:-*
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*🚩1. कौआ :-* कौए को अतिथि-आगमन का सूचक और पितरों का आश्रम स्थल माना जाता है। श्राद्ध पक्ष में कौओं का बहुत महत्व माना गया है। इस पक्ष में कौओं को भोजन कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है। शास्त्रों के अनुसार कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में स्थित होकर विचरण कर सकती है।

*🚩2. हंस :-* पक्षियों में हंस एक ऐसा पक्षी है जहां देव आत्माएं आश्रय लेती हैं। यह उन आत्माओं का ठिकाना हैं जिन्होंने अपने ‍जीवन में पुण्यकर्म किए हैं और जिन्होंने यम-नियम का पालन किया है। कुछ काल तक हंस योनि में रहकर आत्मा अच्छे समय का इंतजार कर पुन: मनुष्य योनि में लौट आती है या फिर वह देवलोक चली जाती है। हो सकता है कि आपके पितरों ने भी पुण्य कर्म किए हों।

*🚩3. गरुड़ :-* भगवान गरुड़ विष्णु के वाहन हैं। भगवान गरुड़ के नाम पर ही गुरुढ़ पुराण है जिसमें श्राद्ध कर्म, स्वर्ग नरक, पितृलोक आदि का उल्लेख मिलता है। पक्षियों में गरुढ़ को बहुत ही पवित्र माना गया है। भगवान राम को मेघनाथ के नागपाश से मुक्ति दिलाने वाले गरूड़ का आश्रय लेते हैं पितर।... इसके अलावा क्रोंच या सारस का नाम भी लिया जाता है। =================================

*⚜️तीन पशु:-*
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*🚩1. कुत्ता :-* कुत्ते को यम का दूत माना जाता है। कहते हैं कि इसे ईधर माध्यम की वस्तुएं भी नजर आती है। दरअसल कुत्ता एक ऐसा प्राणी है, जो भविष्‍य में होने वाली घटनाओं और ईथर माध्यम (सूक्ष्म जगत) की आत्माओं को देखने की क्षमता रखता है। कुत्ते को हिन्दू देवता भैरव महाराज का सेवक माना जाता है। कुत्ते को भोजन देने से भैरव महाराज प्रसन्न होते हैं और हर तरह के आकस्मिक संकटों से वे भक्त की रक्षा करते हैं। कुत्ते को रोटी देते रहने से पितरों की कृपा बनी रहती है।

*🚩2. गाय :-* जिस तरह गया में सभी देवी और देवताओं का निवास है उसी तरह गाय में सभी देवी और देवताओं का निवास बताया गया है। दरअसल मान्यता के अनुसार 84 लाख योनियों का सफर करके आत्मा अंतिम योनि के रूप में गाय बनती है। गाय लाखों योनियों का वह पड़ाव है, जहां आत्मा विश्राम करके आगे की यात्रा शुरू करती है।

*🚩3. हाथी :-* हाथी को हिन्दू धर्म में भगवान गणेश का साक्षात रूप माना गया है। यह इंद्र का वाहन भी है। हाथी को पूर्वजों का प्रतीक भी माना गया है। जिस दिन किसी हाथी की मृत्यु हो जाती है उस दिन उसका कोई साथी भोजन नहीं करता है। हाथियों को अपने पूर्वजों की स्मृतियां रहती हैं। अश्विन मास की पूर्णिमा के दिन गजपूजा विधि व्रत रखा जाता है। सुख-समृद्धि की इच्छा रखने वाले उस दिन हाथी की पूजा करते हैं।.. इसके अलावा वराह, बैल और चींटियों का यहां उल्लेख किया जा सकता है। जो चींटी को आटा देते हैं और छोटी-छोटी चिड़ियों को चावल देते हैं, वे वैकुंठ जाते हैं। =================================

*⚜️तीन जलचर जंतु:-*
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*🚩1.मछली :-* भगवान विष्णु ने एक बार मत्स्य का अवतार लेकर मनुष्य जाती के अस्त्वि को जल प्रलय से बचाया था। जब श्राद्ध पक्ष में चावल के लड्डू बनाए जाते हैं तो उन्हें जल में विसर्जित कर दिया जाता है।

*🚩2. कछुआ :-* भगवान विष्णु ने कच्छप का अवतार लेकर ही देव और असुरों के लिए मदरांचल पर्वत को अपनी पीठ पर स्थापित किया था। हिन्दू धर्म में कछुआ बहुत ही पवित्र उभयचर जंतु है जो जल की सभी गतिविधियों को जानता है।

*🚩3. नाग :-* भारतीय संस्कृति में नाग की पूजा इसलिए की जाती है, क्योंकि यह एक रहस्यमय जंतु है। यह भी पितरों का प्रतीक माना गया है।... इसके अलावा मगरमच्छ भी माना जाता है।
*चन्द्रशेखर शर्मा ,जबलपुर*
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06/09/2020

एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगा कि..

"मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।"

पंडितजी के पूछने पर उस फकीर ने कहा कि...

जब आपके चढाये जल और भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा.

इस पर पंडितजी बहुत लज्जित हुए।"

यह मनगढंत कहानी सुनाकर एक इंजीनियर मित्र जोर से ठठाकर हँसने लगे और मुझसे बोले कि -

"सब पाखण्ड है जी..!"

शायद मैं कुछ ज्यादा ही सहिष्णु हूँ...

इसीलिए, लोग मुझसे ऐसी बकसोदी करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं है क्योंकि, पहले मैं सामने वाली की पूरी बात सुन लेता हूँ... उसके जबाब उसे जबाब देता हूँ.

खैर... मैने कुछ कहा नहीं ....

बस, सामने मेज पर से 'कैलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया...
और, अपने कान से लगा लिया.

बात न हो सकी... तो, उस इंजीनियर साहब से शिकायत की.

इस पर वे इंजीनियर साहब भड़क गए.

और, बोले- " ये क्या मज़ाक है...??? 'कैलकुलेटर' में मोबाइल का फंक्शन भला कैसे काम करेगा..???"

तब मैंने कहा.... तुमने सही कहा...
वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि.... स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी ???

इस पर इंजीनियर साहब अपनी झेंप मिटाते हुए कहने लगे-
"ये सब पाखण्ड है , अगर ये सच है... तो, इसे सिद्ध करके दिखाइए"

इस पर मैने कहा.... ये सब छोड़िए
और, ये बताइए कि न्युक्लीअर पर न्युट्रान के बम्बारमेण्ट करने से क्या ऊर्जा निकलती है ?

वो बोले - " बिल्कुल ! इट्स कॉल्ड एटॉमिक एनर्जी।"

फिर, मैने उन्हें एक चॉक और पेपरवेट देकर कहा, अब आपके हाथ में बहुत सारे न्युक्लीयर्स भी हैं और न्युट्रांस भी...!

अब आप इसमें से एनर्जी निकाल के दिखाइए...!!

साहब समझ गए और तनिक लजा भी गए एवं बोले-
"जी , एक काम याद आ गया; बाद में बात करते हैं "

कहने का मतलब है कि..... यदि, हम किसी विषय/तथ्य को प्रत्यक्षतः सिद्ध नहीं कर सकते तो इसका अर्थ है कि हमारे पास समुचित ज्ञान, संसाधन वा अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं है ,

इसका मतलब ये कतई नहीं कि वह तथ्य ही गलत है.

क्योंकि, सिद्धांत रूप से तो हवा में तो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों मौजूद है..
फिर , हवा से ही पानी क्यों नहीं बना लेते ???

अब आप हवा से पानी नहीं बना रहे हैं तो... इसका मतलब ये थोड़े ना घोषित कर दोगे कि हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही नहीं है.

हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म दान आदि आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं.

इसीलिए, व्यर्थ के कुतर्को मे फँसकर अपने धर्म व संस्कार के प्रति कुण्ठा न पालें...!

और हाँ...

जहाँ तक रह गई वैज्ञानिकता की बात तो....

क्या आपने किसी भी दिन पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं...या, किसी को लगाते हुए देखा है?
क्या फिर पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ?
इसका जवाब है नहीं....

ऐसा इसीलिए है क्योंकि... बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु वह नहीं लगेगी.

इसका कारण यह है कि प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है.

जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं.

उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं.

और... किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन (O2) देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है.

साथ ही आप में से बहुत लोगों को यह मालूम ही होगा कि मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है.

तो, इस नयी पीढ़ी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है...

शायद, इसलिए ऋषि मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी.

जिससे कि कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये......

इसीलिए.... श्राघ्द का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है.

साथ ही... जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आएंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं.

अतः.... सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पे उंगली उठाने वालों से इतना ही कहना है कि....
जब दुनिया में तुम्हारे ईसा-मूसा-भूसा आदि का नामोनिशान नहीं था...

उस समय भी हमारे ऋषि मुनियों को मालूम था कि धरती गोल है और हमारे सौरमंडल में 9 ग्रह हैं.

साथ ही... हमें ये भी पता था कि किस बीमारी का इलाज क्या है...
कौन सी चीज खाने लायक है और कौन सी नहीं...?

इसीलिए... तुम सब हमें ज्ञान न दो वही अच्छा है

23/08/2020

घर की नकारात्मक ऊर्जा हटाने के लिय उपाय
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जैसा की आप जानते है की हर घर में कोई न कोई वास्तु दोष अवश्य मिलता है ऐसे में घर में कोई न कोई समस्या बनी रहती है। वास्तु दोष से घर में नकारात्मक उर्जा भी इकट्ठी होती रहती है जो घर में कलह का कारण बन जाती है तो साथ ही परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य की हानी पैसे के बचत न होने आदि समस्या उत्पन्न कर देती है। आज कुछ उपाय पोस्ट कर रहा हूँ जिससे आप घर में नकारात्मक उर्जा को खत्म कर सके।

1. एक कटोरी में जल लेकर उसे तीन से चार घंटे के लिए सूर्य की रौशनी में रख दें और फिर उसे भगवान का स्मरण करते हुए पुरे घर में आम या अशोक के पतों से छिडक दें। इसकेलिये आप गौमूत्र या गंगाजल का भी प्रयोग कर सकते है।

2. घर में आप गुग्गूल की धुप जलाकर किसी भी मन्त्र का जप करते हुये पुरे घर में भुमाये ये भी नकारात्मक ऊर्जा को घर से बाहर करने का उत्तम उपाय है।

3. शाम के समय घर के सभी कोनो में नमक बिखरा दें और सुबह उस नमक को बाहर फेंक दें कोनों की सफाई करके। नमक को नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने वाला माना गया है। आप पोछा लगाते समय पानी में थोड़ा नमक मिला सकते है।

4. घर में हर रोज कुछ समय के भजन कीर्तन अवस्य लगाये या पूजा करते समय घंटी आदि बजाते हुवे मधुर स्वर में भजन गायन करे।

5. शंख की ध्वनी भी इस कार्य के लिय उत्तम मानी जाती है और शंख से घर में जल भी छिडक सकते है। एक अन्य मान्यता के अनुसार घर में शंख रखना शुभ नही माना जाता ये केवल मन्दिर में रखना चाहिए।

6. यदि आप किसी ऐसे घर में प्रवेश करते है जहाँ पहले अन्य कोई रहता था तो उनके द्वारा छोड़ी हुई नकारात्मक उर्जा दूर करने के लिए सबसे बेहतर उपाय है की आप घर में पहले रंग रोगन करवा लें उसके बाद घर में प्रवेश करे।

7. घर की सभी खिडकियों को हर रोज कम से कम 20 मिनट अवस्य खोलना चाहिए।

8. गाय के देशी घी का दीपक हर रोज घर में जलाना भी घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

9. घर के मन्दिर में देवी देवताओं को चढ़ाये गये फुल के हार दुसरे दिन अवस्य उतार देने चाहिए पुराने फूल भी नकारात्मक ऊर्जा देते है।

10. धूल मिटटी कबाड़ खराब बिजली के उपकरण भी घर से हटा देने चाहिए ये भी नकारात्मक ऊर्जा देने वाले होते है।

11. घर में तुलसी का पोधा अवस्य लगाये।

इन सामान्य उपायो द्वारा आप अपने घर की नकारात्मक ऊर्जा को काफी हद तक कम कर सकते है साथ ही आप समय समय पर घर में हवन आदि भी करवाते रहे।

23/08/2020

*कई बार हम अपने आप दवाई लेते हैँ मगर वो काम नहीं करती और वही दवाई डॉक्टर लिख कर दे तो काम कर जाती है...*

इसका कारण है कि बीमारी ज्यादातर राहु की देन होती है ये जिस ग्रह के साथ लग जाता है उसी तरह के वायरस का रूप ले लेता है और डॉक्टर मंगल शनि का मिश्रण है...
ज़ब मंगल शनि मिलते हैं तो राहु शांत रहता है उच्च प्रभाव देता है क्योंकि दोनों ही राहु को दबाने में सक्षम हैँ इसलिये ज़ब मंगल शनि के प्रभाव में हम जाकर आते हैँ तो वायरस का निदान होना शुरू हो जाता है क्योंकि अपने हाथ से ली गई दवाई तो सिर्फ शनि की होगी....

इसी तरह आदमी कई उपाय कर लेता है हाथ से .... मगर ज़ब कोई आचार्य बताये तो लग जाते हैँ क्योंकि परेशानियाँ अधिकतर पापी ग्रह की देन है और बृहस्पति के सामने ये भले ही अंदर से दुश्मनी रखें लेकिन मौन रहते हैँ... जिस तरह घर का मुखिया कुछ बोल दे तो अंदर से झुंझलाहट होगी लेकिन बड़े हैँ तो कुछ कह भी नहीं सकते.... फिर बृहस्पति का क्षेत्र और भाव सबसे अधिक है इसलिये बृहस्पति की ऊर्जा लिये बैठा आचार्य साधु या मंदिर का पुजारी, देवता हो उनके सानिध्य में पापी ग्रह अपना दुष्प्रभाव काफ़ी हद तक त्याग देते हैँ....

लाल किताब में एक उपाय बताया गया है कि सूर्य 12वें भाव में हो तो बिजली मैकेनिक से यदा कदा बिजली के काम करवाएं घर बुला कर और उसको पैसे दें... क्योंकि 12 वां घर राहु का पक्का घर है और वहाँ राहु का दुश्मन ग्रह सूर्य बैठ गया तो राहु प्रधान जातक यानि बिजली वाला आकर जायेगा तो राहु ख़ुश रहेगा... जिस तरह हम मकान किरायेदार को देते हैँ लेकिन अपनी तसल्ली के लिये सँभालने भी जाते हैँ ताकि टूट फूट कब्जा न हो...
इसलिये बुजुर्गो नें कहा भी है कि.....
जिसका काम उसी को साजे दूजा करे तो मूर्ख बाजे....

18/07/2019

╔══════════════════╗
║ घर मे गरीबी आने के कारण ║
╚══════════════════╝
1💲= रसोई घर के पास में पेशाब करना ।
2💲= टूटी हुई कन्घी से कंगा करना ।
3💲= टूटा हुआ सामान उपयोग करना।
4💲= घर में कूडा - कचरा रखना।
5💲= रिश्तेदारो से बदसुलूकी करना।
6💲= बांए पैर से पैंट पहनना।
7💲= संध्या वेला मे सोना।
8💲= मेहमान आने पर नाराज होना।
9💲= आमदनी से ज्यादा खर्च करना।
10💲= दाँत से रोटी काट कर खाना।
11💲= चालीस दीन से ज्यादा बाल रखना ।
12💲= दांत से नाखून काटना।
14💲= औरतो का खडे खडे बाल बांधना।
15💲 = फटे हुए कपड़े पहनना ।
16💲= सुबह सूरज निकलने तक सोते रहना।
17💲= पेड के नीचे पेशाब करना।
18💲= उल्टा सोना।
19💲= श्मशान भूमि में हसना ।
20💲= पीने का पानी रात में खुला रखना ।
21💲= रात में मांगने वाले को कुछ ना देना ।
22💲= बुरे ख्याल लाना।
23💲= पवित्रता के बगैर धर्मग्रंथ पढना।
24💲= शौच करते वक्त बाते करना।
25💲= हाथ धोए बगैर भोजन करना ।
26💲= अपनी सन्तान को कोसना।
27💲= दरवाजे पर बैठना।
28💲= लहसुन प्याज के छिलके जलाना।
29💲= साधू फकीर को अपमानित करना या फिर और कोई चीज खरीदना।
30💲= फूक मार के दीपक बुझाना।
31💲= ईश्वर को धन्यवाद किए बगैर भोजन करना।
32💲= झूठी कसम खाना।
33💲= जूते चप्पल उल्टा देख कर उसको सीधा नही करना।
34💲= हालात जनाबत मे हजामत करना।
35💲= मकड़ी का जाला घर में रखना।
36💲= रात को झाडू लगाना।
37💲= अन्धेरे में भोजन करना ।
38💲= घड़े में मुंह लगाकर पानी पीना।
39💲= धर्मग्रंथ न पढ़ना।
40💲= नदी, तालाब में शौच साफ करना और उसमें पेशाब करना ।
41💲= गाय , बैल को लात मारना ।
42💲= माँ-बाप का अपमान करना ।
43💲= किसी की गरीबी और लाचारी का मजाक उडाना ।
44💲= दाँत गंदे रखना और रोज स्नान न करना ।
45💲= बिना स्नान किये और संध्या के समय भोजन करना ।
46💲= पडोसियों का अपमान करना, गाली देना ।
47💲= मध्यरात्रि में भोजन करना ।
48💲= गंदे बिस्तर में सोना ।
49💲= वासना और क्रोध से भरे रहना एवम्...
50💲= दूसरे को अपने से हीन समझना आदि ।
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शास्त्रों में है कि जो दूसरो का भला करता है।
ईश्वर उसका भला करता है।

22/01/2019

दूध + दालचीनी
और
🌷 अनगिनत फायदे🌷

दूध तो हम में से कई लोग पीते है फिर भी लोगो को शिकायत रहती है

कि उन्हें दूध पचता नही है
और
ना ही शरीर को लगता है।
आज हम आपको एक ऐसी चीज बतायेंगे जिसे दूध में डालकर पीने से आपका शरीर फौलाद की तरह बन जायेगा। आप बीमारियों से कोसों दूर हो जाएंगे और एक स्वस्थ-निरोगी काया पाएंगे।

ये चीज है दालचीनी जिसे हम दैनिक जीवन मे बहुतायत से उपयोग करते है पर इसके कई फायदों से अनजान हैं। दालचीनी को इसके अनोखे गुणों के कारण वंडर स्पाइस भी कहते है। दालचीनी को दूध के साथ मिलाकर पीने से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं। यह ना केवल आपके शरीर को मजबूत करती है बल्कि सुंदरता भी बढ़ाती है।

दालचीनी वाला दूध बनाने के लिए आपको एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी अच्छी तरह मिला देना है और इसका गर्म ही सेवन करना है। इस दूध को पीने से आपको कई फायदे होंगे जैसे :-

◆आपका ब्लड सुगर लेवल रेगुलेट रहेगा यानी डाइबिटिज के मरीजों के लिए दालचीनी वाला दूध बहुत बहुत फायदेमंद है।

◆ये स्किन और बालों से सम्बंधित हर समस्या को दूर करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो बालों और स्किन से जुड़ी रोगाणुओं को नष्ट कर देते हैं।

◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से गठिया और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं होती ही नही हैं। और जिन लोगो को आर्थराइटिस से सम्बंधित समस्या है उन्हें इससे आराम मिलेगा।

◆पढ़ाई करने वाले छात्रों को दालचीनी वाला दूध देने से उनकी एकाग्रता और मेमोरी पावर बढ़ती है।

◆यदि आपको नींद ना आने कि समस्या है तो रोज रात को ये दूध पीने से आपकी ये समस्या धीरे धीरे चली जायेगी।

◆यदि आप वजन कम करने के लिए परेशान हो रहे है तो रोज रात को दालचीनी वाला दूध पीने से आप महिने में 3 से 4 किलो वजन घटा सकते है।

◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से आपको जीवन मे कभी भी दिल की बीमारी या हार्ट स्ट्रोक का सामना नही करना पड़ेगा।

08/01/2019

आज़ जानकारी वास्तु की . मै आपका मित्र . . एस्ट्रो रजनीश अग्रवाल . .गोल्ड मेडलीस्ट ..
= मुख्य द्वार : घर के मुख्य द्वार पर मांगलिक चिन्हों जैसे - ऊँ, स्वास्तिक का प्रयोग करना चाहिए . घर में मुख्य द्वार जैसे अन्य द्वार नहीं बनाने चाहिए तथा मुख्य द्वार को फल, पत्र, लता आदि के चित्रों से अलंकृत करना चाहिए . . मुख्य द्वार पर कभी भी वीभत्स चित्र इत्यादि नहीं लगाने चाहिए . .
= बैठक कक्ष या ड्राइंग रूम : इस कक्ष में फर्नीचर, शो केस तथा अन्य भारी वस्तुएं दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में रखनी चाहिए . इस कक्ष में यदि कृत्रिम पानी का फव्वारा या अक्वेरियम रखना हो तो उसे उत्तर-पूर्व कोण में रखना चाहिए . . टीवी दक्षिण-पश्चिम या अग्नि कोण में रखा जा सकता है . . बैठक में ही मृत पूर्वजों के चित्र दक्षिण या पश्चिमी दीवार पर लगाना चाहिए . . इस कक्ष की दीवारों का हल्का नीला, आसमानी, पीला, क्रीम या हरे रंग का होना उत्तम होता है . .
= शयन कक्ष : शयन कक्ष में कभी भी देवी-देवताओं या पूर्वजों के चित्र नहीं लगाने चाहिए . . इस कक्ष में पलंग दक्षिणी दीवारों से सटा होना चाहिए . सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा में होना चाहिए . शयन कक्ष में सोते समय पैर दरवाजे की तरफ नहीं होना चाहिए . शयन कक्ष में दर्पण नहीं होना चाहिए, इससे परस्पर कलह होता है . . इस कक्ष की दीवारों का रंग हल्का होना चाहिए . .
= रसोईघर : रसोई गृह में भोजन बनाते समय गृहिणी का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए . बरतन, मसाले, राशन इत्यादि पश्चिम दिशा में रखने चाहिए . .बिजली के उपकरण दक्षिण-पूर्व में रखने चाहिए . जूठे बरतन तथा चूल्हे की स्लैब अलग होनी चाहिए। रसोईघर में दवाइयां नहीं रखनी चाहिए . . रसोईघर में काले रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए . . यह हरा, पीला,क्रीम या गुलाबी रंग का हो सकता है . .
= पूजाघर : घर में पूजा घर या पूजा का स्थान ईशान कोण में होना चाहिए . पूजा घर में मूर्तियां या फोटो इस तरह से रखनी चाहिए कि वे आमने-सामने न हों . . मूर्तियां बारह अंगुल से अधिक ऊंची नहीं रखना चाहिए . . पूजा गृह शयन कक्ष में नहीं होना चाहिए . यदि शयनकक्ष में पूजा का स्थान बनाना मजबूरी हो तो वहां पर्दे की व्यवस्था करनी चाहिए . . पूजा गृह हेतु सफेद, हल्का पीला अथवा हल्का गुलाबी रंग शुभ होता है . .
= स्नानगृह तथा शौचालय : स्नानगृह की आंतरिक व्यवस्था में नल को पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगाना चाहिए जिससे स्नान के समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में हो . स्नान घर में वॉश बेसिन ईशान या पूर्व में रखना चाहिए . . गीजर, स्विच बोर्ड आदि अग्नि कोण में होना चाहिए . . बाथटब इस प्रकार हो कि नहाते समय पैर दक्षिण दिशा में न हों . बाथरूम की दिवारों या टाइल्स का रंग हल्का नीला, आसमानी, सफेद या गुलाबी होना चाहिए . . शौचालय में व्यवस्था इस प्रकार हो कि शौच में बैठते समय मुख दक्षिण या पश्चिम में हो . .
= जुड़े रहिये मुझसे . . नित नयी नयी जानकारी . . जन्मपत्रिका विवेचना . .भाग्यवृद्धि पत्रिका . . लैब टेस्टेड रत्न . . . हेतु सम्पर्क करे . . " एस्ट्रो रजनीश अग्रवाल " . ..गोल्ड मेडलीस्ट . . . 08109820082 . .

प्रेम का सागर लिखूँ! या चेतना का चिंतन लिखूँ!प्रीति की गागर लिखूँ, या आत्मा का मंथन लिखूँ!रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित,चाह...
08/01/2019

प्रेम का सागर लिखूँ!
या चेतना का चिंतन लिखूँ!
प्रीति की गागर लिखूँ,
या आत्मा का मंथन लिखूँ!
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित,
चाहे जितना लिखूँ....

ज्ञानियों का गुंथन लिखूँ ,
या गाय का ग्वाला लिखूँ..
कंस के लिए विष लिखूँ ,
या भक्तों का अमृत प्याला लिखूँ।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ....

पृथ्वी का मानव लिखूँ ,
या निर्लिप्त योगेश्वर लिखूँ।
चेतना चिन्तन लिखूँ,
या संतृप्त देवेश्वर लिखूँ ।।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ....

जेल में जन्मा लिखूँ ,
या गोकुल का पलना लिखूँ।
देवकी की गोदी लिखूं ,
या यशोदा का ललना लिखूँ ।।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ....

गोपियों का प्रिय लिखूँ,
या राधा का प्रियतम लिखूं।
रुक्मणि का श्री लिखूँ
या सत्यभामा का प्रीतम लिखूँ।।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ....

देवकी का नंदन लिखूँ,
या यशोदा का लाल लिखूँ।
वासुदेव का तनय लिखूं,
या नंद का गोपाल लिखूँ।।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ...

नदियों-सा बहता लिखूँ,
या सागर-सा गहरा लिखूँ।
झरनों-सा झरता लिखूँ ,
या प्रकृति का चेहरा लिखूँ।।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ....

आत्मतत्व चिंतन लिखूँ,
या प्राणेश्वर परमात्मा लिखूँ।
स्थिर चित्त योगी लिखूं,
या यताति सर्वात्मा लिखूँ।।
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूँ.....

कृष्ण तुम पर क्या लिखूँ,
कितना लिखूँ..
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूं...

प्रेम का सागर लिखूँ! या चेतना का चिंतन लिखूँ! प्रीति की गागर लिखूँ, या आत्मा का मंथन लिखूँ! रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषि....

31/12/2018

हमारे चार वेद है। 1] ऋग्वेद 2] सामवेद 3] अथर्ववेद 4] यजुर्वेद *************कुल 6 शास्त्र है। 1] वेदांग 2] सांख्य 3] निरूक्त 4] व्याकरण 5] ...

20/12/2018

हिन्दू महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार का विशेष महत्व है। विवाह के बाद स्त्री इन सभी चीजों को अनिवार्य रूप से धारण करती ह.....

10/10/2017

भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। वैज्ञानिक तर्क- तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्र...

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