25/08/2026
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
कभी राजनीतिक गलियारों में 'पार्ट-टाइम पॉलिटिशियन' या केवल दूर से मुद्दे उठाने वाले नेता के तौर पर आलोचना झेलने वाले राहुल गांधी अब एक आक्रामक और सड़क पर उतरकर सीधे संघर्ष करने वाले नेता के रूप में उभर रहे हैं।
बीते हफ्तों का उदाहरण ले तो ऐसा लग रहा है कि पारंपरिक राजनीति से हटकर राहुल गांधी अब बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे प्रशासनिक और सरकारी दफ्तरों के सामने मोर्चा खोल रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में उनके इस नए तेवर ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि कई बार उनकी अपनी पार्टी को भी हैरान कर दिया है।
उदाहरण के तौर पर, हाल ही में जुलाई के छात्र आंदोलन के दौरान पेलेट गन लगने से गंभीर रूप से घायल हुए 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब की FIR दर्ज करवाने के लिए राहुल गांधी अचानक दिल्ली के डीसीपी कार्यालय पहुंचे।
पुलिस के हीला-हवाली करने पर वे वहीं धरने पर बैठ गए। करीब 6 घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और प्रियंका गांधी के साथ आने के बाद आखिरकार पुलिस को मजबूरन FIR दर्ज करनी पड़ी।
अब इससे पहले पहले नीट (NEET) परीक्षा और पेपर लीक के विरोध में हुए छात्रों के प्रदर्शन के दौरान भी राहुल गांधी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाते हुए सीधे प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के पास विरोध प्रदर्शन किया था।
राहुल गांधी के इन अचनाक से आए बदलाव को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी की रणनीति में आया यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि वे अब किसी मुद्दे को उठाकर बीच में छोड़ने के बजाय उसके अंत तक उसके साथ बने रहना चाहते हैं।
अच्छा, इस बात में कोई दोहराई नहीं है कि साल 2022 की कन्याकुमारी से कश्मीर तक की 'भारत जोड़ो यात्रा' ने उनकी छवि को पूरी तरह बदल दिया। इस लंबी पैदल यात्रा ने लोगों के बीच यह संदेश दिया कि वे शारीरिक मेहनत और जनता के साथ सीधे जुड़ाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
इसके अलावा गौर करने वाली बात यह भी है कि 2024 में लोकसभा में विपक्ष के नेता बनने के बाद से वे संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह बेहद मुखर और आक्रामक नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया या अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर वे लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
Rahul Gandhi