12/07/2026
*मुसलमानों को अपनी पहचान छिपाने की सलाह मॉब लिंचिंग का समाधान नहीं*
*पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज़ खान के बयान पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की दोटूक प्रतिक्रिया*
नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026: जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज़ खान द्वारा मुसलमानों को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए अपनी वेशभूषा बदलने और पारंपरिक पहनावे को छोड़ने की सलाह को तथ्यों की अनदेखी और समस्या का गलत आकलन करार दिया है।
मौलाना मदनी ने कहा कि किसी पूर्व आईएएस अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा मुसलमानों को इस प्रकार की सलाह दिया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है, क्योंकि समस्या पीड़ित की दाढ़ी, उसके सिर की टोपी, किसी महिला के हिजाब या किसी व्यक्ति के कुर्ता-पायजामा में नहीं है, बल्कि असली समस्या हमलावर के मन में मौजूद नफरत और उस माहौल में है, जिसमें भीड़ खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। इसलिए अपराधी को रोकने और सजा देने के बजाय पीड़ित से अपनी पहचान मिटाने की मांग न तो न्यायसंगत है और न ही कोई सभ्य लोकतांत्रिक देश इसकी अनुमति दे सकता है।
मौलाना मदनी ने कहा कि यहां सभी घटनाओं का उल्लेख संभव नहीं है, लेकिन उदाहरण के तौर पर कुछ प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया जा सकता है। इनमें 2015 में दादरी, उत्तर प्रदेश में मोहम्मद अखलाक की हत्या; 2018 में अलवर, राजस्थान में रकबर खान और हापुड़, उत्तर प्रदेश में कासिम कुरैशी की मॉब लिंचिंग; 2019 में झारखंड में तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग; 2023 में भरतपुर, राजस्थान के नासिर और जुनैद को वाहन सहित जिंदा जला दिया जाना; और 2025 में चरखी दादरी, हरियाणा में रहने वाले बंगाली मुस्लिम प्रवासी मजदूर साबिर मलिक की बेरहमी से हत्या शामिल है। इन सभी घटनाओं में पीड़ितों का पहनावा न तो हमले की मूल वजह था और न ही उनकी वेशभूषा किसी विशिष्ट मुस्लिम पहचान को जाहिर करती थी।
मौलाना मदनी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि बोस्निया के मुसलमान भाषा, पहनावे, बाहरी वेशभूषा और सामाजिक रहन-सहन के लिहाज से अपने ईसाई पड़ोसियों से अलग नजर नहीं आते थे। इसके बावजूद उन्हें सामूहिक नरसंहार, अमानवीय अत्याचारों और नस्लीय सफाए का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इन सभी तथ्यों के मद्देनजर असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि पीड़ित ने क्या पहन रखा था। असली सवाल यह है कि किसी भीड़ को किसी नागरिक का नाम पूछने, उसकी पहचान की जांच करने, उसकी गाड़ी का पीछा करने, उस पर हमला करने और उसकी हत्या करने का साहस क्यों हुआ? यदि हम इस बुनियादी सवाल से ध्यान हटाकर पीड़ित के पहनावे और हुलिए पर केंद्रित कर देंगे, तो अनजाने में हिंसा की जिम्मेदारी अपराधी से हटाकर पीड़ित के कंधों पर डाल देंगे।
मौलाना मदनी ने कहा कि जब किसी समुदाय के खिलाफ लगातार नफरत पैदा की जाए, उसे संदिग्ध बनाया जाए और उसकी सामूहिक पहचान को खतरे के रूप में पेश किया जाए, तो केवल अपनी पहचान बदल लेना कभी भी सुरक्षा की गारंटी नहीं बन सकता।
उन्होंने जोर देकर कहा, "देश में शांति और कानून-व्यवस्था की स्थापना कानून का शासन सुनिश्चित करने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तहसीन एस. पूनावाला बनाम भारत संघ मामले में जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) को सख्ती और निष्पक्षता से लागू करने तथा मॉब लिंचिंग के अपराधियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने से ही संभव होगी। इसलिए हम देश के सभी समझदार और जिम्मेदार लोगों से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर इन बुनियादी मुद्दों पर ध्यान दें और देश की प्रतिष्ठा तथा भलाई के लिए काम करें।"
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संपादक महोदय से अनुरोध है कि इस प्रेस रिलीज़ को प्रकाशित कर अनुगृहीत करें।
मोहम्मद अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी
सचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद