21/04/2023
एकलव्य विद्यालय, कालसी
2011 की जनगणना के अनुसार देश की 8.6% जनजातीय आबादी में से मात्र 59% ही शिक्षित हैं, जो राष्ट्रीय साक्षरता दर 74% से काफी कम है। इस स्थिति में सुधार की दिशा में जनजाति कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में चलाए जा रहे 401 एकलव्य विद्यालय महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनमें से अपनी शैक्षिक दक्षता में उत्कृष्ट एकलव्य विद्यालय, कालसी, देहरादून ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलहदा पहचान कायम की है। जिसमें इस विद्यालय की नींव रखने वाले शिक्षकों के अथक प्रयास, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के सहयोग की अहम भूमिका है। लेकिन पिछले कुछ समय से गैर जरूरी प्रशासनिक हस्तक्षेप ने इस विद्यालय के संचालन में लगातार बाधा उत्पन्न की है।
चंद माह पूर्व भी निदेशक, जनजाति कल्याण, उत्तराखंड द्वारा एकलव्य विद्यालय, कालसी के संचालन में व्यवधान उत्पन्न किया गया था, तत्कालीन प्राचार्य एवं उप प्राचार्य ने लिखित तौर पर गैर जरूरी हस्तक्षेप न करने की शर्त पर अपना इस्तीफा वापस लिया था। किन्तु पुनः उक्त अधिकारी द्वारा विद्यालय के नव प्राचार्य की नियुक्ति हेतु मुख्यमंत्री, उत्तराखंड के साथ अपने तथाकथित संबंधों के दुरुपयोग एवं अन्य साथियों के साथ षड्यन्त्र के तहत इस प्रक्रिया को न केवल आयोजित किया, बल्कि अनुचित नियुक्ति को अंजाम दिया। जबकि एकलव्य विद्यालय संगठन समिति के संबंध में निदेशक, जनजाति कल्याण को कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।
अतः समस्त जनजातीय समुदाय की माँग को मद्देनजर रखते हुए एस एस टोलिया, निदेशक, जनजाति कल्याण को एकलव्य विद्यालय की कार्यान्वयन समिति (वर्किंग ग्रुप)से बाहर किया जाए; ताकि विद्यालय के प्रबंधन एवं प्रशासनिक कार्य दक्षता के साथ क्रियान्वित किए जा सकें।
श्रीमान असित गोपाल, आयुक्त द्वारा एकलव्य विद्यालय, कालसी के उत्कृष्ट प्रबंधन एवं प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए; देशभर के विद्यालयों के लिए नजीर बताते हुए पूर्व में भी अनुचित हस्तक्षेप न करने के संबंध में पत्र लिखा जा चुका है। किन्तु एक अयोग्य व्यक्ति का निदेशक सरीखे महत्वपूर्ण पद पर बैठना, इसकी गरिमा एवं विधि के तहत कार्य करने के कर्तव्य को धूमिल कर रहा है। अनुचित हस्तक्षेप के चलते विद्यालय की सबसे वरिष्ठ एवं राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाज़ी गई शिक्षिका सुधा पैन्यूली ने पुनः इस्तीफा दे दिया है, अभिभावकों द्वारा उनके समर्थन में एवं विद्यालय को बचाने के लिए लगातार विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।
भारत रुरल लाइव्लीहुड फाउंडेशन की ट्राइबल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2022 के अनुसार कक्षा 8 से पहले ही 48.2% जनजातीय बच्चे स्कूल छोड़ देते है, जबकि कक्षा 10 तक यह आँकड़ा 62.2% पहुँच जाता है। ऐसे में एकलव्य विद्यालय, कालसी ने पिछले कई वर्षों से तकरीबन हर बार 100% विद्यार्थियों के 10वी एवं 12वी कक्षा में उत्तीर्ण होने के परीक्षा परिणाम दिए है।ऐसे उत्कृष्ट विद्यालय की व्यवस्था को सुनियोजित ढंग से अनुचित हस्तक्षेप द्वारा बर्बाद करने की कोशिशों से वर्तमान विद्यार्थी, पूर्व छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक आहत हैं एवं विरोध जाहिर कर रहे हैं। यदि इस संस्थान को नुकसान पहुंचाया गया, तो विद्यार्थियों के साथ-साथ यह जनजाति समुदाय एवं राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था की भी हानि होगी।
धन्यवाद ।
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