Adi Badri - Kedarnath Dham, Yamunanagar

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Adi Badri Dham, Kedarnath Temple, Mata Mantra Devi Temple & Saraswati Udgam Sathal - in foothills of Shivalik Hills, Northern Yamunanagar - form a sacred confluence of faith and heritage, one of Haryana’s oldest Vedic sites.

Adi Badri - Kedarnath Dham, Yamunanagar - आदिबद्री-माता मंत्रा देवी मंदिर हरियाणा राज्य की शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं में ...
04/11/2025

Adi Badri - Kedarnath Dham, Yamunanagar - आदिबद्री-माता मंत्रा देवी मंदिर हरियाणा राज्य की शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं में सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित माता मंत्रा देवी का मंदिर यमुनानगर-जगाधरी से बिलासपुर (व्यासपुर) रणजीतपुर होते हुए काठगढ़ गांव तक 35 कि.मी. की दूरी सडक़ मार्ग द्वारा तय करके पैदल 4 कि0मी0 ऊपर पर्वत श्रृंखलाओं में विद्यमान है।

मंत्रों से प्रकट हुई माता मंत्रा देवी का यह मंदिर भारत वर्ष में एक अद्वितीय रूप में हरियाणा राज्य की सबसे ऊंची 2 हजार फुट पहाड़ी चोटी पर सुशोभित है। यहां एक सुंदर गुफा में नर-नारायण की अति दिव्य लौकिक एवं मनमोहक दो मूॢतयां एक ही लाल पत्थर में अंकित होकर पिण्डी रूप में विराजमान हैं।

गुफा के अंदर जाने से रोकने के लिए चार फुट ऊंचे द्वारपाल के रूप में श्री हनुमान जी एवं भैरव जी ऐसे खड़े हैं जैसे वैकुण्ठ में जाने से रोकने के लिए जय-विजय खड़े रहते हैं। लोगों का मानना है कि यहां वर्ष में एक बार समस्त देवता अपने हाथों से हलवा प्रसाद आदि मिष्ठान बनाकर भगवती के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।

लक्ष्मी पूजा की अर्ध रात्रि में माता मंत्रा देवी के मंदिर के 500 मीटर नीचे स्थित बरगद के पेड़ से आज भी हर साल एक चमकती हुई ज्योति प्रकट होती है और मंदिर में जाकर विलीन हो जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस रास्ते से ज्योति प्रकट होती है ठीक उसी रास्ते में आज भी हर साल शेर के पद चिन्हों के दर्शनार्थ भारी संख्या में भक्तगण इस रात मंदिर में निवास करते हैं।

माँ माता मंत्रा देवी के मंदिर से पूर्व दिशा में एक विशाल पर्वत है जिसे गुरू शिखर कहते हैं और उसी के ठीक 500 मीटर नीचे ब्रह्मा, विष्णु व शिव नाम के तीन कुंड हैं जो प्राकृतिक पत्थरों से स्वनिर्मित हैं। सृष्टि पालन और संहार के लिए लोक चौदह भुवन स्वर्ग मृत्यु पाताल तैतीस कोटि देवता होते हैं परन्तु देवताओं को उस शक्ति के बारे में जानकारी नहीं थी।

अत: देवताओं ने यज्ञ रचाये और आदिशक्ति ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। उसी समय वो शक्ति जो देवताओं को देखने को मिली वही दो शक्ति एक ही लाल पत्थर में अलग-अलग रूप में अंकित होकर पिंडी के रूप में इस पर्वत पर निवास करती है।

यमुनानगर-जगाधरी से व्यासपुर, रणजीतपुर होते हुए काठगढ़ गांव से छोटी बड़ी मनमोहक पर्वत मालाओं को पार करके 4 कि0मी0 पैदल पर्वत श्रृंखला नाहन, सरौठा जमदाग्नि धूना रेणुका एवं हिमाचल की अनेक श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य देखते हुए ऊंची चोटी पर स्थित अति प्राचीन लक्ष्मी नारायण के उस मंदिर में पहुंचा जा सकता है जिसकी स्थानीय लोग सदियों से माता मंत्रादेवी के नाम से पूजा आराधना करते आ रहे हैं।

इस बारे में किवदंती है कि भगवान विष्णु ने एक बार लक्ष्मी जी से कहा कि हे लक्ष्मी वैसे तो मैं तुम्हे एक क्षण भी अपनी सेवा विमुख नहीं रखना चाहता हूँ परन्तु इस समय पृथ्वी संकटों से घिरी हुई है। अत: उसका उद्धार करने हेतु मुझे सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के नजदीक कुछ समय एकांत में तप करना होगा। तुम निश्चिंत रहना मैं पृथ्वी की ङ्क्षचता दूर करके शीघ्र ही वापस आऊंगा। ऐसा कहकर श्री विष्णु बैकुण्ठ धाम से आदिबद्री क्षेत्र में पृथ्वी पर आकर तप करने लगे।

उधर लक्ष्मी जी को भी लगा कि विष्णु अकेले तप कर रहे है मैं भी उनके तप में सहयोगी बनूं। इसी इच्छा से श्री लक्ष्मी जी भी विष्णु जी को देखने पृथ्वी पर आ गई। लक्ष्मी जी देखती हैं कि समस्त भू-मंडल के मालिक भगवान विष्णु वैशाख-ज्येष्ठ (मई-जून) महीने की कठोर धूप में खुले आकाश के नीचे घोर तप कर रहे हैं। लक्ष्मी जी यह दृश्य देख न सकी और तुरंत श्री विष्णु के तप करने के स्थान पर एक बदरी (बेरी) का पेड़ बन भगवान विष्णु को शीतल छाया प्रदान करने लगी।

भगवान विष्णु तपस्या में लीन थे और शीत, उष्ण, सर्दी, गर्मी, धूप, छाया आदि की ओर उनका कोई ध्यान नहीं था। एक दिन व समय भी आया जिस दिन भगवान विष्णु का तप पूरा होना था उसी उपलक्ष में देवताओं ने एक अति सुंदर यज्ञ का आयोजन किया। परन्तु अर्धांगिनी के बिना यज्ञ कैसे पूरा होगा।

भगवान विष्णु की चिंता को दूर करने हेतु समस्त देवताओं ने यज्ञ से एक दिव्य कन्या को प्रकट किया और भगवान विष्णु को इसे अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करने को कहा। इतने में लक्ष्मी जी बदरी (बेर) के पेड़ के रूप में सहभागिनी बनी हुई थी व सब घटना देख रही थी उसे लगा कि अब नारायण भगवान विष्णु दूसरा विवाह रचाने लगे हैं तथा मुझे त्याग देंगे, भगवान विष्णु बैकुंठ वापिस नहीं जाएंगे। इस भय से लक्ष्मी बदरी (बेरी)के पेड़ के रूप को छोडक़र अपने असली रूप में प्रकट हो गई।

बेरी का पेड़ गायब हो गया। उसी पेड़ की जगह लक्ष्मी भगवान विष्णु के पीछे खड़ी नजर आई। यह देख विष्णु भगवान ने मंत्रों से प्रकट हुई उस कन्या से कहा कि हे कन्या आप अत्यंत भाग्यशाली हो मैं आपके साथ सदा ही निवास करूगा परन्तु अब श्री लक्ष्मी जी आ गई हैं इस अवस्था में आप ही मेरी रक्षा कर सकती हैं। आपके उपकार को मैं तुम्हे सम्पूर्ण शक्ति प्रदान करके चुकाऊंगा और आपके भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हुए कलयुग में आपका चारों दिशाओं में यश फैलाऊंगा। तुम इसमें तनिक भी संदेह न करो। आप तत्काल ही यहां से अंतर्ध्यान होकर सामने पर्वत शिखर में निवास करो। वहां तुम्हारी व मेरी दोनों की ही दिव्य लाल वर्ण के पत्थर की प्रतिमा में मैं तुम्हारे साथ निरंतर निवास करूंगा। फिर भी यह स्थान मेरे नाम से न होकर केवल तुम्हारे नाम से ही जाना जाएगा। इस पुण्य तीर्थ में लोग पूजा भी तुम्हारी ही करेंगे।

कलयुग में भक्तों को वरदान देने के लिए माता मंत्रा देवी के नाम से आप सदा ही सुविख्यात होंगी। मैं तुम्हारे साथ नित्य चमत्कारी लीलाएं करता रहूंगा। आदिबद्री क्षेत्र में स्थित गांव रामपुर गेंडा के एक किसान को पशु चराते हुए मां मंत्रा देवी उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने के लिए कहा। किसान ने माँ मंत्रा से वरदान मांगा कि मेरी इच्छा घी की छाव में सोने की है। माता मंत्रा देवी ने उसकी इच्छा पूर्ण की और उसके घर में इतनी गऊएं एवं दुधारू पशु हो गए कि उसके घर में घी-दूध की कोई कमी नहीं रही।

लोक नायक भगवान विष्णु के ऊपर संकट मंडराता देख यज्ञ मंत्रों से प्रकट हुई कन्या मंत्रा देवी इस प्राचीन भवन में श्री नारायण के सूक्ष्म विग्रह के साथ निवास करने लगी। उधर लक्ष्मी सहित विष्णु जी यज्ञ समाप्त कर व पृथ्वी को संकटों से मुक्त कर क्षीर सागर में पहले की तरह लक्ष्मी जी के साथ रहने लगे।

कार्तिक मास की पूर्णिमा के उपलक्ष में तीर्थराज कपाल मोचन में आयोजित होने वाले कपाल मोचन मेला में सदियों से आने वाले श्रद्धालु एवं यात्री यहां के तीनों पवित्र सरोवरों में स्नान करने के बाद आदिबद्री क्षेत्र में स्थित सरस्वती के उद्गम स्थल के दर्शनों व आदि नारायण मंदिर तथा केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद श्रद्धालु ऊंचे पर्वत पर स्थित माता मंत्रा देवी के मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाते हैं।

आदिबद्री क्षेत्र देवताओं की तपोभूमि मानी जाती है और यहीं से सरस्वती नदी का उद्गम हुआ है। कपाल मोचन मेला के दौरान व अन्य पावन अवसरों पर श्रद्धालु सरस्वती स्नान सरोवर में भी स्नान करते हैं।

Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar यमुनानगर टूरिज्म

Adi Badri - Kedarnath Dham, Yamunanagar Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar  यमुनानगर टूरिज्म
04/11/2025

Adi Badri - Kedarnath Dham, Yamunanagar Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar यमुनानगर टूरिज्म

 Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar
26/11/2023

Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar

* मेला कपाल मोचन तीर्थ 15 से 19 नवम्बर 2021 तक *मेला प्रशासक एवं एसडीएम बिलासपुर जसपाल सिंह गिल व डीएसपी आशीष चौधरी ने K...
13/11/2021

* मेला कपाल मोचन तीर्थ 15 से 19 नवम्बर 2021 तक *
मेला प्रशासक एवं एसडीएम बिलासपुर जसपाल सिंह गिल व डीएसपी आशीष चौधरी ने Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar के तीनों सरोवरों की साफ-सफाई व पानी भराई को लेकर सरोवरों का जायजा लिया। उन्होंने मेले के प्रबन्धों व व्यवस्थाओं को लेकर भी पूरे मेले का दोरा भी किया। आदिबद्री धाम, सरसवती नदी उद्गम स्थल, यमुनानगर

इस वर्ष नहीं लगेगा मेलाआदिबद्री धाम। महर्षि वेद व्यास की कर्मस्थली बिलासपुर में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर प...
27/11/2020

इस वर्ष नहीं लगेगा मेला
आदिबद्री धाम। महर्षि वेद व्यास की कर्मस्थली बिलासपुर में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले कपाल मोचन मेले को कोविड 19 की विश्वव्यापी की महामारी के चलते इस वर्ष यह मेला आयोजित नहीं होगा व मेला स्थगित रहेगा।
उपायुक्त मुकुल कुमार के निर्देशानुसार बिलासपुर के एसडीएम वीरेंद्र सिंह ढुल ने शुक्रवार को कपाल मोचन मेले में श्रद्धालु न पहुंचे इसके लिए पुलिस प्रशासन द्वारा लगाए गए नाकों व सभी सरोवरों की सफाई को लेकर दौरा किया। दौरे के दौरान उन्होंने आदेश दिए कि कोई भी श्रद्धालु कपाल मोचन मेले में न आए इसके लिए कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर मुस्तेद रहे कोई भी कोताई न बरतें।
एसडीएम वीरेंद्र सिंह ढुल ने बताया कि सरोवरों में पानी खड़ा होने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, जिससे कोरोना बीमारी ज्यादा फैल सकती है, इसलिए सभी सरोवरों से पानी निकाल कर सफाई कराई जा रही है। उन्होंने सभी मंदिर, धर्मशाला व डेरा संचालकों को उनके धार्मिक स्थलों पर केवल हवन यज्ञ करने की अनुमति दी। कोई भी धर्मिक स्थल भण्डारे का आयोजन नहीं करेगा और न ही अपने धार्मिक स्थल में किसी को ठहरने के लिए स्थान देगा।

आदिबद्री धाम। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ...
23/11/2020

आदिबद्री धाम। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे भारत की प्राचीन संस्कृति से जुड़ी सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने की परियोजना के लिए बेहतर तालमेल से कार्य करें। उन्होंने हरियाणा सरस्वती विकास बोर्ड और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे 31 मार्च 2021 तक इस परियोजना की टैकनिकल ड्राईंग तैयार करने का कार्य पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री रत्तनलाल कटारिया इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार से मिलने वाले हर सहयोग में दोनों राज्यों के अधिकारियों के सम्पर्क में रहेंगे।
श्री शेखावत आज आदिबद्री में वन विभाग के सर्किट हाऊस में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति एवं सामाजिक न्याय अधिकारिता राज्यमंत्री रत्तनलाल कटारिया, हरियाणा के शिक्षा एवं वन मंत्री कंवर पाल, कुरूक्षेत्र के सांसद नायब सिंह सैनी, हरियाणा पब्लिक इंट्ररपाईजिज के चेयरमैन सुभाष बराला, यमुनानगर के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, सढ़ौरा के पूर्व विधायक बलवंत सिंह, हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष राम निवास गर्ग, भाजपा के जिला अध्यक्ष राजेश सपरा, भाजपा नेत्री बंतो कटारिया, नाहन के विधायक राजीव बिंदल, हरियाणा सरस्वती विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष घूमन सिंह किरमच, अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेन्द्र सिंह, उपायुक्त मुकुल कुमार, पुलिस अधीक्षक कमलदीप सिंह गोयल सहित हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठï अधिकारी व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय मंत्री सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने अपने करकमलों से सरस्वती स्नान सरोवर के तट पर पौधारोपण किया और सरस्वती स्नान सरोवर पर विधिवत पूजा अर्चना की। इस सरोवर में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों की 421 नदियों के जल के क्लश को सरस्वती में प्रवाहित किया। इससे पूर्व केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री व अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सरस्वती उद्गम स्थल पर पूजा अर्चना भी की। सभी गणमान्य व्यक्तियों ने आदिबद्री नारायण मंदिर व श्री केदारनाथ मंदिर में भी पूजा अर्चना की।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि परियोजना के प्रथम चरण में हरियाणा और हिमाचल के क्षेत्र में दो डैम तैयार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भारत की सभ्यता का विकास सिन्धू सभ्यता से जुड़ा है और यह सभ्यता सरस्वती नदी के किनारे पर ही पनपी है। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने इस प्राचीन धरोहर को पुर्नजीवित करने का प्रकल्प लिया है और इसके लिए इसरो व अन्य वैज्ञानिक और भूगोलिक शोध के दौरान सरस्वती नदी के बहने के रास्ते व इससे जुड़े अन्य पहलूओं के साक्ष्य जुड़ाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश में 200 किलोमीटर तक इस नदी में जल प्रवाह की कार्य योजना पर काम किया जा रहा है और सरस्वती नदी के साथ-साथ मेरे गृह क्षेत्र राजस्थान के जैसलमेर व गुजरात के कच्छ इत्यादि क्षेत्रों में भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना जल संरक्षण, सिंचाई, पेयजल के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। इसके उपरांत उन्होंने सरस्वती नदी की खोज में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले जगाधरी निवासी दर्शन लाल जैन के निवास स्थान पर उनसे भेंट की और उनका कुशलक्षेम पूछा।
इससे पूर्व सिंचाई विभाग हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेन्द्र ङ्क्षसह व अधीक्षक अभियंता अरविंद कौशिक ने केन्द्रीय मंत्री व उपस्थित मंत्रियों को पावर प्रजैन्टेशन के माध्यम से सरस्वती नदी के साक्ष्यों और सरस्वती विकास बोर्ड हरियाणा द्वारा इस परियोजना पर किए गए कार्यों की जानकारी दी गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि इस परियोजना के लिए मुख्यमत्री मनोहर लाल ने हरियाणा और हिमाचल सरकारों में एमओयू तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं और दोनों सरकारों ने इस पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि इस नदी के लिए हिमाचल प्रदेश क्षेत्र से 20 क्यूशिक जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और इसके लिए काठगढ़ क्षेत्र में 400 एकड़ पंचायती भूमि पर जल भण्डारण परियोजना भी तैयार की जा रही है। हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों ने हिमाचल क्षेत्र में मारकण्डा नदी के बरसाती जल को भी सरस्वती परियोजना से जोडऩे का सुझाव दिया। - यमुनानगर हलचल

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14/09/2020

🚩🚩 हर हर महादेव 🚩🚩 आदि केदार नाथ मन्दिर 🚩🚩

आदिबद्री धाम, आदिबद्री नारायण मंदिर, केदार नाथ मंदिर, माता मंत्रा देवी मंदिर, सरस्वती नदी उद्गम स्थल, यमुनानगर (हरियाणा)
Adibadri Dham, Adibadri Narayan Mandir, Kedar Nath Mandir, Mata Mantra Devi Mandir, Saraswati Nadi Udgam Sathal, Yamunanagar (Haryana)

आदिबद्री धाम, केदार नाथ मंदिर, सरस्‍वती नदी उद्गम स्थल, यमुनानगर
11/08/2020

आदिबद्री धाम, केदार नाथ मंदिर, सरस्‍वती नदी उद्गम स्थल, यमुनानगर

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Adibadri Narayan Temple, Kedar Nath Shiv Temple, Mata Mantra Devi Temple, Saraswati Udgam Sathal, Kathgarh, Distt. Yamunanagar

Sri Adibadri Narayan Mandir, Shri Kedarnath Shiv Mandir, Mata Mantra Devi Mandir and Sarasvati River Point of Origin, is a tourist site of archaeological, religious and ecological significance in a forest area in the foothills of the Sivalik Hills in Bhabar area, situated in northern part of Yamunanagar district, of the north Indian state of Haryana. Adi Badri, often related to the Saraswati River, is one of the most ancient Vedic religious site in Haryana, along with 48 kos parikrama of Kurukshetra, Dhosi Hill and Kapal Mochan. The Somb river passing through here is considered by some to follow the course of the Rig Vedic Sarasvati river. Adi Badri Vatika herbal park developed by the state's forests department also lies here. #AdibadriDham #SaraswatiUdgamSathal #Kedarnath #MantraDevi #ShrineBoard #Yamunanagar #YamunanagarHulchul