गौड.विप्र सेवा संघ नेपाल

गौड.विप्र सेवा संघ नेपाल GOUD VIPRA SEWA SANGH (NEPAL)( #परशुराम मन्दिर सिनामंगल,काठमाडौनेपाल #)

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️🌞 पञ्चाङ्ग — 05 सितंबर 2026📅 दिन — शनिवार 📜 कल्प — श्वेत-वराह👑 मन्वंतर — वैवस्वत⏳ युग — कलियुग (28वाँ ...
05/09/2026

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️
🌞 पञ्चाङ्ग — 05 सितंबर 2026
📅 दिन — शनिवार
📜 कल्प — श्वेत-वराह
👑 मन्वंतर — वैवस्वत
⏳ युग — कलियुग (28वाँ चतुर्युग – प्रथम चरण)
📿 विक्रम संवत — 2083 [रौद्र]
📿 शक संवत — 1948
🌞 अयन — दक्षिणायण (उत्तर गोले)
🔥 ऋतु — वर्षा
📆 मास — भाद्रपद
🌑 पक्ष — कृष्ण
🌞 सूर्य राशि — सिंह
🌙 चंद्र राशि — वृष ➡️ 10:22 AM से मिथुन
🌅 सूर्योदय — 05:46 AM
🌇 सूर्यास्त — 06:14 PM
📅 तिथि — नवमी (08:46 PM से दशमी )
🌟 नक्षत्र — मृगशिरा (09:32 PM से आर्द्रा )
✨ योग — वज्र (01:48 PM से सिद्धि )
🧿 करण — तैतिल (10:00 AM से गर )
📍 दिशाशूल — पूर्व दिशा में
🌺 व्रत पर्व — गोगा नवमी, नन्द महोत्सव
━━━━━━━━━━━━━━━
⚔️ शुभ-अशुभ मुहूर्त

☠️ राहुकाल —08:52 AM से 10:26 AM
⚠️ यमगण्ड — 01:33 PM से 03:07 PM
🟤 गुलिक काल — 05:46 AM से 07:18 AM
🚫 दुर्मुहूर्त — 05:46 AM से 06:35 AM
✨ अभिजित मुहूर्त — 11:35 AM से 12:25 PM

🌞 दिन का चौघड़िया

⛔ काल : 05:46 AM से 07:18 AM
✨ शुभ : 07:18 AM से 08:52 AM
💊 रोग : 08:52 AM से 10:26 AM
⚡ उद्वेग : 10:26 AM से 12:00 PM
🚶 चर : 12:00 PM से 01:33 PM
💰 लाभ : 01:33 PM से 03:07 PM
🟡 अमृत : 03:07 PM से 04:41 PM
⛔ काल : 04:41 PM से 06:14 PM

🌙 रात्रि का चौघड़िया

💰 लाभ : 06:14 PM से 07:41 PM
⚡ उद्वेग : 07:41 PM से 09:07 PM
✨ शुभ : 09:07 PM से 10:34 PM
🟡 अमृत : 10:34 PM से 12:00 AM
🚶 चर : 12:00 AM से 01:26 AM
💊 रोग : 01:26 AM से 02:53 AM
⛔ काल : 02:53 AM से 04:19 AM
💰 लाभ : 04:19 AM से 05:47 AM 🌅

📿 चौघड़िया फल विचार

✨ चर में चक्र चलाइये, उद्वेगे थलगार।
✨ शुभ में स्त्री श्रृंगार करे, लाभ में करो व्यापार॥
✨ रोग में रोगी स्नान करे, काल करो भण्डार।
✨ अमृत में काम सभी करो, सहाय करो कर्तार

🌞 दिन का होरा

🪐 शनि — 05:46 AM – 06:47 AM
📿 गुरु — 06:47 AM – 07:50 AM
🔥 मंगल — 07:50 AM – 08:52 AM
🌞 सूर्य — 08:52 AM – 09:55 AM
💎 शुक्र — 09:55 AM – 10:57 AM
📗 बुध — 10:57 AM – 12:00 PM
🌙 चन्द्र — 12:00 PM – 01:02 PM
🪐 शनि — 01:02 PM – 02:05 PM
📿 गुरु — 02:05 PM – 03:07 PM
🔥 मंगल — 03:07 PM – 04:10 PM
🌞 सूर्य — 04:10 PM – 05:12 PM
💎 शुक्र — 05:12 PM – 06:14 PM

🌒 रात्रि का होरा

📗 बुध — 06:14 PM – 07:12 PM
🌙 चन्द्र — 07:12 PM – 08:10 PM
🪐 शनि — 08:10 PM – 09:07 PM
📿 गुरु — 09:07 PM – 10:05 PM
🔥 मंगल — 10:05 PM – 11:02 PM
🌞 सूर्य — 11:02 PM – 12:00 AM
💎 शुक्र — 12:00 AM – 12:58 AM
📗 बुध — 12:58 AM – 01:55 AM
🌙 चन्द्र — 01:55 AM – 02:53 AM
🪐 शनि — 02:53 AM – 03:50 AM
📿 गुरु — 03:50 AM – 04:48 AM
🔥 मंगल — 04:48 AM – 05:47 AM 🌅

📕 उपरोक्त पंचांग की गणना श्री काशी समयानुसार की गई है।

जय श्री शनिदेव 🙏🚩

🦚🌸 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएं 🌸🦚समस्त सनातन प्रेमियों को भक्ति, उल्लास और निष्काम कर्म के महापर्व श्रीक...
04/09/2026

🦚🌸 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएं 🌸🦚

समस्त सनातन प्रेमियों को भक्ति, उल्लास और निष्काम कर्म के महापर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएं। 🙏🚩

अधर्म के संहारक, श्रीमद्भगवद्गीता के अमर प्रणेता और बाल-सुलभ वात्सल्य के अद्वितीय प्रतीक, पूर्णब्रह्म योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण आपके जीवन से समस्त संतापों का हरण करें।

मुरलीधर की अहैतुकी कृपा से आपके परिवार में सुख, समृद्धि, शांति और धर्मनिष्ठा का शाश्वत वास हो। ✨

हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की! 🦚✨

🌹 जय श्री कृष्ण! 🚩
🙏 राधे राधे! 🙏

बहुत समय पहले की बात है। जब धरती पर अधर्म बढ़ने लगा था और अत्याचारी कंस के कारण मथुरा की प्रजा भय में जी रही थी, तब भगवा...
03/09/2026

बहुत समय पहले की बात है। जब धरती पर अधर्म बढ़ने लगा था और अत्याचारी कंस के कारण मथुरा की प्रजा भय में जी रही थी, तब भगवान श्रीहरि विष्णु ने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेने का संकल्प किया। उसी दिव्य समय में भगवान विष्णु के परम सेवक और अनंत स्वरूप माने जाने वाले शेषनाग भी अपनी अद्भुत लीला के साथ पृथ्वी पर प्रकट हुए। वे किसी साधारण सर्प के समान नहीं थे। शेषनाग को अनंत कहा गया, क्योंकि उनकी कोई सीमा नहीं मानी जाती। धार्मिक परंपरा में उन्हें भगवान विष्णु की शय्या, सेवक और दिव्य शक्ति का स्वरूप माना गया है। जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर श्रीकृष्ण के रूप में आए, तब शेषनाग भी उनके साथ एक विशेष रूप में अवतरित हुए। यही कारण है कि कृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर उनके जीवन के अनेक प्रसंगों में शेषनाग का संबंध दिखाई देता है।

कृष्ण जन्म की वह रात अत्यंत अद्भुत थी। मथुरा की कारागार में आधी रात के समय देवकी ने भगवान श्रीकृष्ण को जन्म दिया। चारों ओर अंधकार था, लेकिन कारागार के भीतर एक दिव्य प्रकाश फैल गया। वासुदेव ने जब उस बालक को देखा तो उन्हें समझ आ गया कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान हैं। भगवान ने वासुदेव से कहा कि वे उन्हें गोकुल ले जाएं और वहां नंद बाबा के घर छोड़ आएं। उसी समय भगवान की माया से कारागार के पहरेदार गहरी नींद में सो गए और वासुदेव की बेड़ियां अपने आप खुल गईं। वासुदेव ने बालक कृष्ण को एक टोकरी में रखा और उन्हें सिर पर उठाकर कारागार से बाहर निकल पड़े।

बाहर भयंकर वर्षा हो रही थी। रात का अंधकार इतना गहरा था कि कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। वासुदेव धीरे-धीरे यमुना के तट की ओर बढ़े। जब वे यमुना के पास पहुंचे तो नदी उफान पर थी। लहरें तेज थीं और चारों ओर वर्षा हो रही थी। वासुदेव के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि नवजात बालक को सुरक्षित गोकुल कैसे पहुंचाया जाए। उन्होंने भगवान का नाम लिया और यमुना में उतर गए। पानी धीरे-धीरे बढ़ता गया। तभी एक अद्भुत घटना घटी।

आकाश में तेज बिजली चमकी और उसी क्षण वासुदेव ने अपने पीछे एक विशाल दिव्य छाया देखी। वह कोई साधारण छाया नहीं थी। वह स्वयं शेषनाग थे। उन्होंने अपने विशाल फनों को फैलाकर बालक कृष्ण के ऊपर छत्र बना दिया। वर्षा की बूंदें उनके फनों पर गिर रही थीं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण तक एक बूंद भी नहीं पहुंच रही थी। वासुदेव आगे बढ़ते रहे और शेषनाग उनके साथ-साथ चलते रहे। ऐसा लग रहा था जैसे स्वयं अनंत भगवान की रक्षा के लिए उनके सेवक पृथ्वी पर उतर आए हों।

यमुना का जल उस समय तेज बह रहा था। लेकिन जैसे ही भगवान कृष्ण के चरण यमुना के जल से स्पर्श हुए, नदी का प्रवाह शांत होने लगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यमुना भी भगवान की परम भक्त थीं और उनके चरणों का स्पर्श पाकर उनका वेग शांत हो गया। वासुदेव ने धीरे-धीरे नदी पार की और गोकुल की ओर बढ़ गए। उनके सिर पर भगवान कृष्ण थे और ऊपर शेषनाग अपने विशाल फनों से उनकी रक्षा कर रहे थे। वह दृश्य इतना दिव्य था कि मानो स्वयं प्रकृति भी उस रात भगवान के स्वागत में खड़ी हो।

वासुदेव जब नंद बाबा के घर पहुंचे तो वहां सभी लोग गहरी नींद में थे। उन्होंने बालक कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया और वहां जन्मी योगमाया को लेकर वापस मथुरा लौट आए। इस तरह कृष्ण गोकुल पहुंच गए और उनकी बाल लीलाओं का आरंभ हुआ। लेकिन शेषनाग और कृष्ण का संबंध यहीं समाप्त नहीं हुआ था। आगे चलकर वृंदावन की धरती पर एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे संसार को यह दिखा दिया कि भगवान के भक्त और भगवान के बीच कैसा अद्भुत संबंध होता है।

गोकुल और वृंदावन में कृष्ण अपने बाल मित्रों के साथ गाय चराने जाते थे। वे कभी बांसुरी बजाते, कभी अपने मित्रों के साथ खेलते और कभी यमुना के किनारे पहुंच जाते। उसी यमुना में एक अत्यंत विषैला नाग रहता था, जिसका नाम कालिय था। कालिय के विष के कारण यमुना का एक हिस्सा दूषित हो गया था। कहा जाता है कि उसके विषैले प्रभाव से वहां का वातावरण भी भयावह हो गया था। पक्षी उस स्थान के ऊपर से उड़ते हुए गिर जाते थे और कोई भी जीव उस जल के पास जाने का साहस नहीं करता था।

एक दिन कृष्ण अपने मित्रों के साथ खेलते हुए उसी स्थान के पास पहुंच गए। उन्होंने देखा कि यमुना का जल शांत दिखाई दे रहा था, लेकिन उसके भीतर भयंकर विष फैला हुआ था। कृष्ण ने निश्चय किया कि इस संकट को समाप्त करना आवश्यक है। वे एक वृक्ष पर चढ़े और वहां से यमुना में छलांग लगा दी। पानी में हलचल मच गई। कालिय नाग क्रोधित होकर बाहर आया। उसके अनेक फन उठे हुए थे और उसकी आंखों में क्रोध था। उसने कृष्ण को अपने सामने देखकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।

लेकिन कृष्ण कोई साधारण बालक नहीं थे। कालिय ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, परंतु कृष्ण उसके बंधन से निकल गए। फिर भगवान उसके फनों पर चढ़ गए। कालिय बार-बार अपने फन उठाता और कृष्ण उन्हें शांत करते जाते। वृंदावन के लोग दूर खड़े होकर यह दृश्य देखकर चिंतित थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि यह छोटा सा बालक इतने विशाल नाग के सामने कैसे खड़ा है।

कृष्ण ने कालिय के फनों पर नृत्य करना शुरू किया। जिस नाग को अपनी शक्ति पर इतना गर्व था, उसकी शक्ति धीरे-धीरे समाप्त होने लगी। अंततः कालिय समझ गया कि जिसके सामने वह खड़ा है, वह कोई साधारण बालक नहीं है। वह स्वयं परम शक्ति हैं। कालिय की पत्नियां भी वहां आईं और भगवान से प्रार्थना करने लगीं कि उनके पति को क्षमा कर दें। भगवान कृष्ण ने कालिय को आदेश दिया कि वह यमुना छोड़कर समुद्र की ओर चला जाए और फिर कभी वृंदावन के लोगों को परेशान न करे। कालिय ने भगवान की आज्ञा स्वीकार की और वहां से चला गया।

लेकिन कृष्ण और शेषनाग की कथा का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है। महाभारत के समय भगवान कृष्ण के साथ जो व्यक्ति सदैव उनके निकट रहा, वह थे बलराम। धार्मिक परंपरा में बलराम को शेषनाग का अवतार माना जाता है। यही कारण है कि कृष्ण और बलराम का संबंध केवल भाइयों का नहीं बल्कि भगवान और उनके अनंत सेवक का भी माना जाता है। कृष्ण जहां भी गए, बलराम उनके साथ रहे। बचपन में दोनों ने गोकुल और वृंदावन में अनेक लीलाएं कीं और बाद में मथुरा तथा द्वारका में भी साथ रहे।

जब कंस ने कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलाया, तब दोनों भाई वहां पहुंचे। कंस ने उन्हें रोकने के लिए अनेक योजनाएं बनाईं, लेकिन अंततः कृष्ण ने कंस का अंत किया और मथुरा को उसके अत्याचार से मुक्त कराया। इस पूरे समय बलराम कृष्ण के साथ रहे। उनके हाथ में हल और मूसल होते थे और वे अपनी शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे। कृष्ण और बलराम की जोड़ी को देखकर लोग कहते थे कि जैसे भगवान विष्णु और शेषनाग स्वयं पृथ्वी पर साथ-साथ चल रहे हों।

समय बीतता गया और कृष्ण द्वारका पहुंचे। वहां उन्होंने एक विशाल नगर बसाया। कृष्ण के जीवन में अनेक युद्ध और संकट आए, लेकिन बलराम हमेशा उनके साथ खड़े रहे। शेषनाग का यह स्वरूप केवल शक्ति का प्रतीक नहीं था। वह सेवा, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार शेषनाग भगवान विष्णु के लिए अपनी पूरी सत्ता समर्पित करते हैं, उसी प्रकार बलराम ने भी कृष्ण के जीवन में भाई, सहयोगी और रक्षक के रूप में उनका साथ निभाया।

शेषनाग को अनंत क्यों कहा जाता है, इसकी भी एक गहरी धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि जब सृष्टि का प्रलय होता है और सब कुछ समाप्त हो जाता है, तब भी अनंत शेष का अस्तित्व बना रहता है। भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं और उनके फनों की छाया भगवान की रक्षा करती है। इसलिए शेषनाग को केवल नागराज नहीं बल्कि भगवान की अनंत सेवा में समर्पित दिव्य शक्ति के रूप में देखा जाता है।

कृष्ण के जन्म की रात यमुना के किनारे शेषनाग का छत्र बनना हो या बलराम के रूप में उनका कृष्ण के साथ पृथ्वी पर रहना, दोनों घटनाओं में एक ही भाव दिखाई देता है। भगवान और उनके भक्त का संबंध केवल पूजा का संबंध नहीं होता। वह प्रेम, विश्वास और सेवा का संबंध होता है। शेषनाग ने भगवान के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया और इसी कारण उन्हें अनंत सेवा का प्रतीक माना गया।

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण जहां होते हैं, वहां उनकी लीला को समझने के लिए केवल उनकी शक्ति को देखना पर्याप्त नहीं है। उनके आसपास रहने वाले भक्तों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। वासुदेव जब कृष्ण को लेकर यमुना पार कर रहे थे, तब शेषनाग ने वर्षा से उनकी रक्षा की। वृंदावन में जब कृष्ण ने कालिय के अहंकार को समाप्त किया, तब उन्होंने यमुना को फिर से जीवन दिया। और जब कृष्ण ने पृथ्वी पर अपनी लीलाएं कीं, तब बलराम उनके साथ रहकर उनकी सहायता करते रहे।

इस कथा का सबसे सुंदर संदेश यही है कि सच्ची शक्ति वही है जो किसी की रक्षा के लिए प्रयोग हो। शेषनाग के पास अपार शक्ति थी, लेकिन उन्होंने उस शक्ति का प्रदर्शन अपने लिए नहीं किया। उन्होंने भगवान की सेवा और रक्षा के लिए उसे समर्पित किया। भगवान कृष्ण ने भी कालिय को केवल दंड नहीं दिया, बल्कि उसे सुधारने का अवसर दिया। यही कारण है कि कृष्ण और शेषनाग की कथा केवल एक चमत्कार की कहानी नहीं है, बल्कि भक्ति, सेवा, समर्पण और धर्म की कहानी है।

आज भी जब श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई जाती है और उस रात का वर्णन होता है, तो बालक कृष्ण के ऊपर फैले शेषनाग के विशाल फनों का दृश्य श्रद्धा से याद किया जाता है। एक ओर सिर पर टोकरी में विराजमान नन्हे कृष्ण और दूसरी ओर उनके ऊपर सुरक्षा कवच बनाकर खड़े अनंत शेष। तेज वर्षा, उफनती यमुना, अंधेरी रात और उस सबके बीच भगवान की दिव्य यात्रा। यह दृश्य भक्तों के मन में आज भी भगवान की उस लीला की याद दिलाता है जिसमें प्रकृति की हर शक्ति जैसे उनकी सेवा में लग गई थी।

और शायद यही कृष्ण और शेषनाग की पूरी कथा का सबसे बड़ा रहस्य है। भगवान चाहे बालक के रूप में धरती पर क्यों न आएं, उनकी दिव्यता कभी उनसे अलग नहीं होती। उनके भक्त उन्हें पहचानें या न पहचानें, लेकिन उनका प्रेम और समर्पण उन्हें सदैव भगवान के निकट रखता है। शेषनाग ने जन्म-जन्मांतर तक भगवान की सेवा को ही अपना सौभाग्य माना और कृष्ण ने भी अपने परम सेवक को अपने साथ रखा। इसलिए कृष्ण और शेषनाग की कथा हमें बताती है कि भक्ति का सबसे ऊंचा रूप केवल भगवान से कुछ मांगना नहीं, बल्कि अपने जीवन को उनकी सेवा और धर्म के लिए समर्पित कर देना है।

जब भी आप श्रीकृष्ण के जन्म की वह अद्भुत रात याद करें, तो उस दृश्य को मन में जरूर देखिए। चारों ओर अंधकार है, आकाश से वर्षा हो रही है, यमुना अपने वेग से बह रही है, वासुदेव अपने सिर पर नन्हे कृष्ण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं और उनके ऊपर अनंत शेष अपने विशाल फनों से भगवान के लिए छत्र बना रहे हैं। उस रात एक पिता अपने पुत्र को सुरक्षित स्थान तक ले जा रहा था, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार स्वयं अनंत शेष भी भगवान की सेवा में उनके साथ चल रहे थे। यही है श्रीकृष्ण और शेषनाग की वह दिव्य कथा, जिसमें भगवान, भक्त और प्रकृति तीनों एक ही लीला का हिस्सा बन जाते हैं। जय श्री कृष्ण। अनंत शेष महाराज की जय।

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️🌞 पञ्चाङ्ग — 03 सितंबर 2026📅 दिन — गुरुवार 📜 कल्प — श्वेत-वराह👑 मन्वंतर — वैवस्वत⏳ युग — कलियुग (28वाँ...
03/09/2026

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️
🌞 पञ्चाङ्ग — 03 सितंबर 2026
📅 दिन — गुरुवार
📜 कल्प — श्वेत-वराह
👑 मन्वंतर — वैवस्वत
⏳ युग — कलियुग (28वाँ चतुर्युग – प्रथम चरण)
📿 विक्रम संवत — 2083 [रौद्र]
📿 शक संवत — 1948
🌞 अयन — दक्षिणायण (उत्तर गोले)
🔥 ऋतु — वर्षा
📆 मास — भाद्रपद
🌑 पक्ष — कृष्ण
🌞 सूर्य राशि — सिंह
🌙 चंद्र राशि — मेष ➡️ 07:52 AM से वृष
🌅 सूर्योदय — 05:45 AM
🌇 सूर्यास्त — 06:15 PM
📅 तिथि — सप्तमी (01:33 AM से अष्टमी )
🌟 नक्षत्र — कृत्तिका (12:45 AM से रोहिणी )
✨ योग — व्याघात (07:48 PM से हर्षण )
🧿 करण — भद्रा (02:39 PM से बव )
📍 दिशाशूल — दक्षिण दिशा में
🌺 व्रत पर्व —

📿 स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं, पाताले च धनागमः।
📿 मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

🚫 भद्रा — 02:39 PM समाप्त
🏵️ भद्रा वास — स्वर्ग लोक
━━━━━━━━━━━━━━━
⚔️ शुभ-अशुभ मुहूर्त

☠️ राहुकाल —01:33 PM से 03:07 PM
⚠️ यमगण्ड — 05:45 AM से 07:18 AM
🟤 गुलिक काल — 08:52 AM से 10:26 AM
🚫 दुर्मुहूर्त — 09:55 AM से 09:45 AM
✨ अभिजित मुहूर्त — 11:35 AM से 12:25 PM

🌞 दिन का चौघड़िया

✨ शुभ : 05:45 AM – 07:18 AM
⚠️ रोग : 07:18 AM – 08:52 AM
🔥 उद्वेग : 08:52 AM – 10:26 AM
🚶‍♂️ चर : 10:26 AM – 12:00 PM
💰 लाभ : 12:00 PM – 01:33 PM
🌼 अमृत : 01:33 PM – 03:07 PM
⛔ काल : 03:07 PM – 04:41 PM
✨ शुभ : 04:41 PM – 06:15 PM

🌙 रात्रि का चौघड़िया

🌼 अमृत : 06:15 PM – 07:41 PM
🚶‍♂️ चर : 07:41 PM – 09:07 PM
⚠️ रोग : 09:07 PM – 10:34 PM
⛔ काल : 10:34 PM – 12:00 AM
💰 लाभ : 12:00 AM – 01:26 AM
🔥 उद्वेग : 01:26 AM – 02:53 AM
✨ शुभ : 02:53 AM – 04:19 AM
🌼 अमृत : 04:19 AM – 05:46 AM 🌅

📿 चौघड़िया फल विचार

✨ चर में चक्र चलाइये, उद्वेगे थलगार।
✨ शुभ में स्त्री श्रृंगार करे, लाभ में करो व्यापार॥
✨ रोग में रोगी स्नान करे, काल करो भण्डार।
✨ अमृत में काम सभी करो, सहाय करो कर्तार

🌞 दिन का होरा

🟡 गुरु : 05:45 AM – 06:47 AM
🔴 मंगल : 06:47 AM – 07:50 AM
🌞 सूर्य : 07:50 AM – 08:52 AM
💖 शुक्र : 08:52 AM – 09:55 AM
🟢 बुध : 09:55 AM – 10:57 AM
🌙 चंद्र : 10:57 AM – 12:00 PM
⚫ शनि : 12:00 PM – 01:02 PM
🟡 गुरु : 01:02 PM – 02:05 PM
🔴 मंगल : 02:05 PM – 03:07 PM
🌞 सूर्य : 03:07 PM – 04:10 PM
💖 शुक्र : 04:10 PM – 05:12 PM
🟢 बुध : 05:12 PM – 06:15 PM

🌙 रात्रि का होरा

🌙 चंद्र : 06:15 PM – 07:12 PM
⚫ शनि : 07:12 PM – 08:10 PM
🟡 गुरु : 08:10 PM – 09:07 PM
🔴 मंगल : 09:07 PM – 10:05 PM
🌞 सूर्य : 10:05 PM – 11:02 PM
💖 शुक्र : 11:02 PM – 12:00 AM
🟢 बुध : 12:00 AM – 12:58 AM
🌙 चंद्र : 12:58 AM – 01:55 AM
⚫ शनि : 01:55 AM – 02:53 AM
🟡 गुरु : 02:53 AM – 03:50 AM
🔴 मंगल : 03:50 AM – 04:48 AM
🌞 सूर्य : 04:48 AM – 05:46 AM 🌄

📕 उपरोक्त पंचांग की गणना श्री काशी समयानुसार की गई है।

जय श्री हरि 🙏🚩

✨ ​द्वापर में जब शेषनाग बने बड़े भाई: भगवान बलराम के जन्म, रेवती संग विवाह और असीम पराक्रम की कथाएं​बुधवार, 02 सितंबर | ...
02/09/2026

✨ ​द्वापर में जब शेषनाग बने बड़े भाई: भगवान बलराम के जन्म, रेवती संग विवाह और असीम पराक्रम की कथाएं

​बुधवार, 02 सितंबर | भाद्रपद कृष्ण षष्ठी, विक्रम संवत 2083 हलषष्ठी पर्व

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी बलराम जन्मोत्सव के रूप में देशभर में मनायी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मान्यता है कि इस दिन भगवान शेषनाग ने द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई के रुप में अवतरित हुए थे। इस पर्व को हलषष्ठी एवं हरछठ के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि मान्यता है कि बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल हैं जिस कारण इन्हें हलधर कहा जाता है इन्हीं के नाम पर इस पर्व को हलषष्ठी के भी कहा जाता है। इस दिन बिना हल चले धरती से पैदा होने वाले अन्न, शाक भाजी आदि खाने का विशेष महत्व माना जाता है। गाय के दूध व दही के सेवन को भी इस दिन वर्जित माना जाता है। साथ ही संतान प्राप्ति के लिये विवाहिताएं व्रत भी रखती हैं।

हिन्दू धर्म के अनुसार इस व्रत को करने वाले सभी लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण और राम भगवान विष्णु जी का स्वरूप है, और बलराम और लक्ष्मण शेषनाग का स्वरूप है. पौराणिक कथाओं के संदर्भ अनुसार एक बार भगवान विष्णु से शेष नाग नाराज हो गए और कहा की भगवान में आपके चरणों में रहता हूं, मुझे थोड़ा सा भी विश्राम नहीं मिलता. आप कुछ ऐसा करो के मुझे भी विश्राम मिले. तब भगवान विष्णु ने शेषनाग को वरदान दिया की आप द्वापर में मेरे बड़े भाई के रूप में जन्म लोगे, तब मैं आपसे छोटा रहूंगा।

हिन्दू धर्म के अनुसार मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण शेषनाग का अवतार थे, इसी प्रकार द्वापर में जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर श्री कृष्ण अवतार में आए तो शेषनाग भी यहां उनके बड़े भाई के रूप में अवतरित हुए. शेषनाग कभी भी भगवान विष्णु के बिना नहीं रहते हैं, इसलिए वह प्रभु के हर अवतार के साथ स्वयं भी आते हैं. बलराम जयंती के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां बलशाली पुत्र की कामना से व्रत रखती हैं, साथ ही भगवान बलराम से यह प्रार्थना की जाती है कि वो उन्हें अपने जैसा तेजस्वी पुत्र प्राप्त करें।

शक्ति के प्रतीक बलराम भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई थे, इन्हें आज्ञाकारी पुत्र, आदर्श भाई और एक आदर्श पति भी माना जाता है। श्री कृष्ण की लीलाएं इतनी महान हैं कि बलराम की ओर ध्यान बहुत कम जाता है। लेकिन श्री कृष्ण भी इन्हें बहुत मानते थे। इनका जन्म की कथा भी काफी रोमांचक है। मान्यता है कि ये मां देवकी के सातवें गर्भ थे, चूंकि देवकी की हर संतान पर कंस की कड़ी नजर थी इसलिये इनका बचना बहुत ही मुश्किल था ऐसें में देवकी के सातवें गर्भ गिरने की खबर फैल गई लेकिन असल में देवकी और वासुदेव के तप से देवकी का यह सत्व गर्भ वासुदेव की पहली पत्नी के गर्भ में प्रत्यापित हो चुका था। लेकिन उनके लिये संकट यह था कि पति तो कैद में हैं फिर ये गर्भवती कैसे हुई लोग तो सवाल पूछेंगें लोक निंदा से बचने के लिये जन्म के तुरंत बाद ही बलराम को नंद बाबा के यहां पालने के लिये भेज दिया गया था।

✨ बलराम जी का विवाह

यह मान्यता है कि भगवान विष्णु ने जब-जब अवतार लिया उनके साथ शेषनाग ने भी अवतार लेकर उनकी सेवा की। इस तरह बलराम को भी शेषनाग का अवतार माना जाता है। लेकिन बलराम के विवाह का शेषनाग से क्या नाता है यह भी आपको बताते हैं। दरअसल गर्ग संहिता के अनुसार एक इनकी पत्नी रेवती की एक कहानी मिलती है जिसके अनुसार पूर्व जन्म में रेवती पृथ्वी के राजा मनु की पुत्री थी जिनका नाम था ज्योतिष्मती। एक दिन मनु ने अपनी बेटी से वर के बारे में पूछा कि उसे कैसा वर चाहिये इस पर ज्योतिष्मती बोली जो पूरी पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली हो। अब मनु ने बेटी की इच्छा इंद्र के सामने प्रकट करते हुए पूछा कि सबसे शक्तिशाली कौन है तो इंद्र का जवाब था कि वायु ही सबसे ताकतवर हो सकते हैं लेकिन वायु ने अपने को कमजोर बताते हुए पर्वत को खुद से बलशाली बताया फिर वे पर्वत के पास पंहुचे तो पर्वत ने पृथ्वी का नाम लिया और धरती से फिर बात शेषनाग तक पंहुची। फिर शेषनाग को पति के रुप में पाने के लिये ज्योतिष्मती ब्रह्मा जी के तप में लीन हो गईं। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने द्वापर में बलराम से शादी होने का वर दिया। द्वापर में ज्योतिष्मती ने राजा कुशस्थली के राजा (जिनका राज पाताल लोक में चलता था) कुडुम्बी के यहां जन्म लिया। बेटी के बड़ा होने पर कुडुम्बी ने ब्रह्मा जी से वर के लिये पूछा तो ब्रह्मा जी ने पूर्व जन्म का स्मरण कराया तब बलराम और रेवती का विवाह तय हुआ। लेकिन एक दिक्कत अब भी थी वह यह कि पाताल लोक की होने के कारण रेवती कद-काठी में बहुत लंबी-चौड़ी दिखती थी पृथ्वी लोक के सामान्य मनुष्यों के सामने तो वह दानव नजर आती। लेकिन हलधर ने अपने हल से रेवती के आकार को सामान्य कर दिया। जिसके बाद उन्होंनें सुख-पूर्वक जीवन व्यतीत किया।

बलराम और रेवती के दो पुत्र हुए जिनके नाम निश्त्थ और उल्मुक थे। एक पुत्री ने भी इनके यहां जन्म लिया जिसका नाम वत्सला रखा गया। माना जाता है कि श्राप के कारण दोनों भाई आपस में लड़कर ही मर गये। वत्सला का विवाह दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण के साथ तय हुआ था, लेकिन वत्सला अभिमन्यु से विवाह करना चाहती थी। तब घटोत्कच ने अपनी माया से वत्सला का विवाह अभिमन्यु से करवाया था।

✨ बलराम जी के हल की कथा

बलराम के हल के प्रयोग के संबंध में किवदंती के आधार पर दो कथाएं मिलती है। कहते हैं कि एक बार कौरव और बलराम के बीच किसी प्रकार का कोई खेल हुआ। इस खेल में बलरामजी जीत गए थे लेकिन कौरव यह मानने को ही नहीं तैयार थे। ऐसे में क्रोधित होकर बलरामजी ने अपने हल से हस्तिनापुर की संपूर्ण भूमि को खींचकर गंगा में डुबोने का प्रयास किया। तभी आकाशवाणी हुई की बलराम ही विजेता है। सभी ने सुना और इसे माना। इससे संतुष्ट होकर बलरामजी ने अपना हल रख दिया। तभी से वे हलधर के रूप में प्रसिद्ध हुए।

एक दूसरी कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी जाम्बवती का पुत्र साम्ब का दिल दुर्योधन और भानुमती की पुत्री लक्ष्मणा पर आ गया था और वे दोनों प्रेम करने लगे थे। दुर्योधन के पुत्र का नाम लक्ष्मण था और पुत्री का नाम लक्ष्मणा था। दुर्योधन अपनी पुत्री का विवाह श्रीकृष्ण के पुत्र से नहीं करना चाहता था। इसलिए एक दिन साम्ब ने लक्ष्मणा से गंधर्व विवाह कर लिया और लक्ष्मणा को अपने रथ में बैठाकर द्वारिका ले जाने लगा। जब यह बात कौरवों को पता चली तो कौरव अपनी पूरी सेना लेकर साम्ब से युद्ध करने आ पहुंचे।

कौरवों ने साम्ब को बंदी बना लिया। इसके बाद जब श्रीकृष्ण और बलराम को पता चला, तब बलराम हस्तिनापुर पहुंच गए। बलराम ने कौरवों से निवेदनपूर्वक कहा कि साम्ब को मुक्तकर उसे लक्ष्मणा के साथ विदा कर दें, लेकिन कौरवों ने बलराम की बात नहीं मानी।

ऐसे में बलराम का क्रोध जाग्रत हो गया। तब बलराम ने अपना रौद्र रूप प्रकट कर दिया। वे अपने हल से ही हस्तिनापुर की संपूर्ण धरती को खींचकर गंगा में डुबोने चल पड़े। यह देखकर कौरव भयभीत हो गए। संपूर्ण हस्तिनापुर में हाहाकार मच गया। सभी ने बलराम से माफी मांगी और तब साम्ब को लक्ष्मणा के साथ विदा कर दिया। बाद में द्वारिका में साम्ब और लक्ष्मणा का वैदिक रीति से विवाह संपन्न हुआ।

✨ बलदेव (हल चंदन छठ) पूजा विधि

कथा करने से पूर्व प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।

पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर गोबर लाएं।

इस तालाब में झरबेरी, ताश तथा पलाश की एक-एक शाखा बांधकर बनाई गई 'हरछठ' को गाड़ दें।

तपश्चात इसकी पूजा करें।

पूजा में सतनाजा (चना, जौ, गेहूं, धान, अरहर, मक्का तथा मूंग) चढ़ाने के बाद धूल, हरी कजरियां, होली की राख, होली पर भूने हुए चने के होरहा तथा जौ की बालें चढ़ाएं।

हरछठ के समीप ही कोई आभूषण तथा हल्दी से रंगा कपड़ा भी रखें। बलदेव जी को नीला तथा कृष्ण जी को पीला वस्त्र पहनाये।

पूजन करने के बाद भैंस के दूध से बने मक्खन द्वारा हवन करें।

पश्चात कथा कहें अथवा सुनें।

ध्यान रखें कि इस दिन व्रती हल से जुते हुए अनाज और सब्जियों को न खाएं और गाय के दूध का सेवन भी न करें, इस दिन तिन्नी का चावल खाकर व्रत रखें

पूजा हो जाने के बाद गरीब बच्चों में पीली मिठाई बांटे.

✨ हलषष्ठी की व्रतकथा निम्नानुसार है

प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा।

यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया।

वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया।

उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया।

इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया।

कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है।

वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए।

ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया।

बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है। तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया।

बलराम जी की कृपा आप और आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे। हलषष्ठी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!

हलषष्ठी पर्व की शुभकामनाओं के साथ अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में ज़रूर दें—जय हलधर!

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️🌞 पञ्चाङ्ग — 01 सितंबर 2026📅 दिन — मंगलवार 📜 कल्प — श्वेत-वराह👑 मन्वंतर — वैवस्वत⏳ युग — कलियुग (28वाँ...
01/09/2026

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️
🌞 पञ्चाङ्ग — 01 सितंबर 2026
📅 दिन — मंगलवार
📜 कल्प — श्वेत-वराह
👑 मन्वंतर — वैवस्वत
⏳ युग — कलियुग (28वाँ चतुर्युग – प्रथम चरण)
📿 विक्रम संवत — 2083 [रौद्र]
📿 शक संवत — 1948
🌞 अयन — दक्षिणायण (उत्तर गोले)
🔥 ऋतु — वर्षा
📆 मास — भाद्रपद
🌑 पक्ष — कृष्ण
🌞 सूर्य राशि — सिंह
🌙 चंद्र राशि — मेष
🌅 सूर्योदय — 05:44 AM
🌇 सूर्यास्त — 06:16 PM
📅 तिथि — चतुर्थी (07:15 AM से पंचमी )
🌟 नक्षत्र — अश्विनी (03:17 AM से भरणी )
✨ योग — वृद्धि (01:10 AM से ध्रुव )
🧿 करण — बालव (07:15 AM से कौलव )
📍 दिशाशूल — उत्तर दिशा में
🌺 व्रत पर्व — रक्षा पंचमी
━━━━━━━━━━━━━━━
⚔️ शुभ-अशुभ मुहूर्त

☠️ राहुकाल —03:07 PM से 04:41 PM
⚠️ यमगण्ड — 08:51 AM से 10:25 AM
🟤 गुलिक काल — 11:59 AM से 01:33 PM
🚫 दुर्मुहूर्त — 08:13 AM से 09:04 AM
✨ अभिजित मुहूर्त — 11:35 AM से 12:25 PM

🌞 दिन का चौघड़िया

⚫ रोग — 05:44 AM से 07:17 AM
🟡 उद्वेग — 07:17 AM से 08:51 AM
🔴 चर — 08:51 AM से 10:25 AM
🟡 लाभ — 10:25 AM से 11:59 AM
🟢 अमृत — 11:59 AM से 01:33 PM
⚫ काल — 01:33 PM से 03:07 PM
🟢 शुभ — 03:07 PM से 04:41 PM
⚫ रोग — 04:41 PM से 06:16 PM

🌙 रात्रि चौघड़िया

⚫ काल — 06:16 PM से 07:43 PM
🟡 लाभ — 07:43 PM से 09:09 PM
🟡 उद्वेग — 09:09 PM से 10:35 PM
🟢 शुभ — 10:35 PM से 12:01 AM
🟢 अमृत — 12:01 AM से 01:27 AM
🔴 चर — 01:27 AM से 02:53 AM
⚫ रोग — 02:53 AM से 04:19 AM
⚫ काल — 04:19 AM से 05:44 AM 🌅

📿 चौघड़िया फल विचार

✨ चर में चक्र चलाइये, उद्वेगे थलगार।
✨ शुभ में स्त्री श्रृंगार करे, लाभ में करो व्यापार॥
✨ रोग में रोगी स्नान करे, काल करो भण्डार।
✨ अमृत में काम सभी करो, सहाय करो कर्तार

🌠 दिन होरा

🔴 मंगल – 05:44 AM से 06:46 AM
🟡 सूर्य – 06:46 AM से 07:49 AM
⚪ शुक्र – 07:49 AM से 08:52 AM
🟢 बुध – 08:52 AM से 09:55 AM
⚪ चंद्र – 09:55 AM से 10:58 AM
🟡 शनि – 10:58 AM से 12:01 PM
🟢 गुरु – 12:01 PM से 01:04 PM
🔴 मंगल – 01:04 PM से 02:07 PM
🟡 सूर्य – 02:07 PM से 03:10 PM
⚪ शुक्र – 03:10 PM से 04:13 PM
🟢 बुध – 04:13 PM से 05:16 PM
⚪ चंद्र – 05:16 PM से 06:16 PM

🌙 रात्रि होरा

🟡 शनि – 06:16 PM से 07:14 PM
🟢 गुरु – 07:14 PM से 08:11 PM
🔴 मंगल – 08:11 PM से 09:08 PM
🟡 सूर्य – 09:08 PM से 10:05 PM
⚪ शुक्र – 10:05 PM से 11:02 PM
🟢 बुध – 11:02 PM से 11:59 PM
⚪ चंद्र – 11:59 PM से 12:56 AM
🟡 शनि – 12:56 AM से 01:53 AM
🟢 गुरु – 01:53 AM से 02:50 AM
🔴 मंगल – 02:50 AM से 03:47 AM
🟡 सूर्य – 03:47 AM से 04:44 AM
⚪ शुक्र – 04:44 AM से 05:44 AM 🌄

📕 उपरोक्त पंचांग की गणना श्री काशी समयानुसार की गई है।

जय श्री राम 🙏🚩

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️🌞 पञ्चाङ्ग — 31 अगस्त 2026📅 दिन — सोमवार 📜 कल्प — श्वेत-वराह👑 मन्वंतर — वैवस्वत⏳ युग — कलियुग (28वाँ च...
31/08/2026

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️
🌞 पञ्चाङ्ग — 31 अगस्त 2026
📅 दिन — सोमवार
📜 कल्प — श्वेत-वराह
👑 मन्वंतर — वैवस्वत
⏳ युग — कलियुग (28वाँ चतुर्युग – प्रथम चरण)
📿 विक्रम संवत — 2083 [रौद्र]
📿 शक संवत — 1948
🌞 अयन — दक्षिणायण (उत्तर गोले)
🔥 ऋतु — वर्षा
📆 मास — भाद्रपद
🌑 पक्ष — कृष्ण
🌞 सूर्य राशि — सिंह
🌙 चंद्र राशि — मीन ➡️ 04:05 AM से मेष
🌅 सूर्योदय — 05:43 AM
🌇 सूर्यास्त — 06:17 PM
📅 तिथि — तृतीया (08:28 AM से चतुर्थी )
🌟 नक्षत्र — रेवती (04:05 AM से अश्विनी )
✨ योग — गंड (03:28 AM से वृद्धि )
🧿 करण — भद्रा (08:28 AM से बव )
📍 दिशाशूल — पूर्व दिशा में
🌙 पंचक — 04:05 AM से समाप्त
🌙 चन्द्रोदय — रात्रि 08:05 PM
🌺 व्रत पर्व — संकष्टी (बहुला) श्री गणेश चतुर्थी, कजरी तीज

📿 स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं, पाताले च धनागमः।
📿 मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

🚫 भद्रा — प्रातः 08:28 AM समाप्त
🏵️ भद्रा वास - मृत्यु लोक
━━━━━━━━━━━━━━━
⚔️ शुभ-अशुभ मुहूर्त

☠️ राहुकाल —07:17 AM से 08:51 AM
⚠️ यमगण्ड — 10:25 AM से 11:59 AM
🟤 गुलिक काल — 01:33 PM से 03:07 PM
🚫 दुर्मुहूर्त — 12:25 PM से 01:15 PM
✨ अभिजित मुहूर्त — 11:35 AM से 12:25 PM

🌞 दिन का चौघड़िया

✨ अमृत : 05:43 AM – 07:17 AM
⛔ काल : 07:17 AM – 08:51 AM
🌸 शुभ : 08:51 AM – 10:25 AM
⚕️ रोग : 10:25 AM – 11:59 AM
⚠️ उद्वेग : 11:59 AM – 01:33 PM
🚩 चर : 01:33 PM – 03:07 PM
💰 लाभ : 03:07 PM – 04:41 PM
✨ अमृत : 04:41 PM – 06:17 PM

🌙 रात्रि चौघड़िया

🚩 चर : 06:17 PM – 07:43 PM
⚕️ रोग : 07:43 PM – 09:09 PM
⛔ काल : 09:09 PM – 10:35 PM
💰 लाभ : 10:35 PM – 12:01 AM
⚠️ उद्वेग : 12:01 AM – 01:27 AM
🌸 शुभ : 01:27 AM – 02:53 AM
✨ अमृत : 02:53 AM – 04:19 AM
🚩 चर : 04:19 AM – 05:44 AM 🌅

📿 चौघड़िया फल विचार

✨ चर में चक्र चलाइये, उद्वेगे थलगार।
✨ शुभ में स्त्री श्रृंगार करे, लाभ में करो व्यापार॥
✨ रोग में रोगी स्नान करे, काल करो भण्डार।
✨ अमृत में काम सभी करो, सहाय करो कर्तार

🌞 दिन का होरा

🌙 चन्द्र : 05:43 AM – 06:46 AM
🪐 शनि : 06:46 AM – 07:49 AM
📿 गुरु : 07:49 AM – 08:52 AM
🔥 मंगल : 08:52 AM – 09:55 AM
☀️ सूर्य : 09:55 AM – 10:58 AM
💎 शुक्र : 10:58 AM – 12:01 PM
📗 बुध : 12:01 PM – 01:04 PM
🌙 चन्द्र : 01:04 PM – 02:07 PM
🪐 शनि : 02:07 PM – 03:10 PM
📿 गुरु : 03:10 PM – 04:13 PM
🔥 मंगल : 04:13 PM – 05:16 PM
☀️ सूर्य : 05:16 PM – 06:17 PM

🌙 रात्रि होरा

💎 शुक्र : 06:17 PM – 07:14 PM
📗 बुध : 07:14 PM – 08:11 PM
🌙 चन्द्र : 08:11 PM – 09:08 PM
🪐 शनि : 09:08 PM – 10:05 PM
📿 गुरु : 10:05 PM – 11:02 PM
🔥 मंगल : 11:02 PM – 11:59 PM
☀️ सूर्य : 11:59 PM – 12:56 AM
💎 शुक्र : 12:56 AM – 01:53 AM
📗 बुध : 01:53 AM – 02:50 AM
🌙 चन्द्र : 02:50 AM – 03:47 AM
🪐 शनि : 03:47 AM – 04:44 AM
📿 गुरु : 04:44 AM – 05:44 AM 🌄

📕 उपरोक्त पंचांग की गणना श्री काशी समयानुसार की गई है।

जय श्री महाकाल 🙏🚩

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️🌞 पञ्चाङ्ग — 30 अगस्त 2026📅 दिन — रविवार 📜 कल्प — श्वेत-वराह👑 मन्वंतर — वैवस्वत⏳ युग — कलियुग (28वाँ च...
30/08/2026

🕉️ सनातन पंचांग 🕉️
🌞 पञ्चाङ्ग — 30 अगस्त 2026
📅 दिन — रविवार
📜 कल्प — श्वेत-वराह
👑 मन्वंतर — वैवस्वत
⏳ युग — कलियुग (28वाँ चतुर्युग – प्रथम चरण)
📿 विक्रम संवत — 2083 [रौद्र]
📿 शक संवत — 1948
🌞 अयन — दक्षिणायण (उत्तर गोले)
🔥 ऋतु — वर्षा
📆 मास — भाद्रपद
🌑 पक्ष — कृष्ण
🌞 सूर्य राशि — सिंह
🌙 चंद्र राशि — मीन
🌅 सूर्योदय — 05:42 AM
🌇 सूर्यास्त — 06:18 PM
📅 तिथि — द्वितीया (09:14 AM से तृतीया )
🌟 नक्षत्र — उत्तराभाद्रपद (04:31 AM से रेवती )
✨ योग — धृति (07:06 AM से शूल )
🧿 करण — गर (09:14 AM से वणिज )
📍 दिशाशूल — पश्चिम दिशा में
🌙 पंचक — चतुर्थ दिवस
🌺 व्रत पर्व — विन्ध्याचली–भीमचंडी देवी जयंती

📿 स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं, पाताले च धनागमः।
📿 मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

🚫 भद्रा — रात्रि 08:50 PM से अगले दिन प्रातः 08:28 AM तक
🏵️ भद्रा वास - मृत्यु लोक
━━━━━━━━━━━━━━━
⚔️ शुभ-अशुभ मुहूर्त

☠️ राहुकाल —04:44 PM से 06:18 PM
⚠️ यमगण्ड — 12:00 PM से 01:34 PM
🟤 गुलिक काल — 03:09 PM से 04:44 PM
🚫 दुर्मुहूर्त — 04:38 PM से 05:29 PM
✨ अभिजित मुहूर्त — 11:35 AM से 12:25 PM

🌞 दिन का चौघड़िया

⚡ उद्वेग — 05:42 AM – 07:15 AM
🚶 चर — 07:15 AM – 08:50 AM
💰 लाभ — 08:50 AM – 10:25 AM
🟡 अमृत — 10:25 AM – 12:00 PM
⛔ काल — 12:00 PM – 01:34 PM
✨ शुभ — 01:34 PM – 03:09 PM
💊 रोग — 03:09 PM – 04:44 PM
⚡ उद्वेग — 04:44 PM – 06:18 PM

🌙 रात्रि का चौघड़िया

✨ शुभ — 06:18 PM – 07:44 PM
🟡 अमृत — 07:44 PM – 09:09 PM
🚶 चर — 09:09 PM – 10:34 PM
💊 रोग — 10:34 PM – 12:00 AM
⛔ काल — 12:00 AM – 01:25 AM
💰 लाभ — 01:25 AM – 02:50 AM
⚡ उद्वेग — 02:50 AM – 04:15 AM
✨ शुभ — 04:15 AM – 05:43 AM 🌅

📿 चौघड़िया फल विचार

✨ चर में चक्र चलाइये, उद्वेगे थलगार।
✨ शुभ में स्त्री श्रृंगार करे, लाभ में करो व्यापार॥
✨ रोग में रोगी स्नान करे, काल करो भण्डार।
✨ अमृत में काम सभी करो, सहाय करो कर्तार

🌞 दिन का होरा

🌞 सूर्य — 05:42 AM – 06:44 AM
💎 शुक्र — 06:44 AM – 07:47 AM
📗 बुध — 07:47 AM – 08:50 AM
🌙 चन्द्र — 08:50 AM – 09:53 AM
🪐 शनि — 09:53 AM – 10:56 AM
📿 गुरु — 10:56 AM – 12:00 PM
🔥 मंगल — 12:00 PM – 01:03 PM
🌞 सूर्य — 01:03 PM – 02:06 PM
💎 शुक्र — 02:06 PM – 03:09 PM
📗 बुध — 03:09 PM – 04:12 PM
🌙 चन्द्र — 04:12 PM – 05:15 PM
🪐 शनि — 05:15 PM – 06:18 PM

🌒 रात्रि का होरा

📿 गुरु — 06:18 PM – 07:15 PM
🔥 मंगल — 07:15 PM – 08:12 PM
🌞 सूर्य — 08:12 PM – 09:09 PM
💎 शुक्र — 09:09 PM – 10:06 PM
📗 बुध — 10:06 PM – 11:03 PM
🌙 चन्द्र — 11:03 PM – 12:00 AM
🪐 शनि — 12:00 AM – 12:56 AM
📿 गुरु — 12:56 AM – 01:53 AM
🔥 मंगल — 01:53 AM – 02:50 AM
🌞 सूर्य — 02:50 AM – 03:47 AM
💎 शुक्र — 03:47 AM – 04:44 AM
📗 बुध — 04:44 AM – 05:43 AM 🌅

📕 उपरोक्त पंचांग की गणना श्री काशी समयानुसार की गई है।

जय सूर्य देव 🙏🚩

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Parshuram Mandir, Sinamangal
Kathmandu

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