14/05/2026
शून्य से शिखर तक: राष्ट्रवाद के उदय की अनकही दास्तां!
यह केवल राजनीति का सफर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को जगाने का एक महासंग्राम है। 1947 के विभाजन की टीस से लेकर 1975 के आपातकाल की बेड़ियों तक, हर चुनौती ने इस संकल्प को और भी मजबूत किया।
दशकों के संघर्ष और अन्त्योदय की विचारधारा ने रंग दिखाया। 1984 में महज 2 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी ने 1996 में पहली बार संसद में सबसे बड़े दल के रूप में अपनी धमक दिखाई।
अटल जी का वह 13 दिनों का साहस और ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा’ का वो मंत्र आज भी हर कार्यकर्ता की रगों में दौड़ता है। 🪷