05/05/2026
"नल सूखे, पर आखें गीली हैं! दक्षिणपुरी की माताओं-बहनों ने खाली मटके लेकर किया जल बोर्ड का घेराव।"
थक-हारकर आज विधायक प्रेम चौहान और पार्षद राम स्वरूप कनौजिया के नेतृत्व में जनता ने जल बोर्ड के दफ्तर का 'चक्का जाम' कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने दफ्तर के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और अधिकारियों को तब तक बाहर नहीं निकलने दिया जब तक कि पानी की समस्या का समाधान नहीं हो गया।
📍 मौके की स्थिति:नारेबाजी: "जब तक प्यास बुझेगी नहीं, जंग हमारी रुकेगी नहीं!" जैसे नारों से पूरा परिसर गूँज उठा।विधायक का बयान: प्रेम चौहान ने साफ़ शब्दों में चेतावनी दी कि दक्षिणपुरी की जनता अब और इंतज़ार नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पाइपलाइनों में गड़बड़ी और पानी के असमान वितरण के कारण इलाके में कृत्रिम किल्लत पैदा की गई है।महिलाओं का दर्द: प्रदर्शन में शामिल सुमित्रा देवी ने कैमरे पर रोते हुए बताया, "60 दिन हो गए, बच्चों को नहलाना तो दूर, पीने का पानी भी 500 रुपये का टैंकर मंगाकर पीना पड़ रहा है।"
🔄 प्रशासनिक प्रतिक्रिया:भारी दबाव और हंगामे के बीच दिल्ली जल बोर्ड के वरिष्ठ इंजीनियरों को एसी कमरों से बाहर आना पड़ा। जनता के गुस्से को देखते हुए अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया है कि:अगले 24 घंटों के भीतर पाइपलाइन की लीकेज ठीक की जाएगी।इलाके में टैंकरों की संख्या दोगुनी कर दी जाएगी।बूस्टर पंपों की जांच कर पानी का प्रेशर बढ़ाया जाएगा।
📢 निष्कर्ष:शाम होते-होते, लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने घेराबंदी हटाई, लेकिन इस चेतावनी के साथ कि अगर दो दिन में नलों से पानी नहीं टपका, तो अगली बार घेराव 'सचिवालय' का होगा। फिलहाल, दक्षिणपुरी की जनता उम्मीद की प्यास लिए अपने घरों को लौट गई है।